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22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है युद्धविराम, क्या फिर शुरू होगा ईरान-अमेरिका युद्ध?

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US iran war

ईरान युद्ध का क्या होगा भविष्य?

US-Iran ceasefire 2026 : ईरान युद्ध का भविष्य क्या होगा और इसका कितना प्रभाव भारत और अन्य देशों पर पड़ेगा, इसे लेकर पूरी दुनिया में चिंता है. 22 अप्रैल को युद्धविराम की अवधि समाप्त हो रही है, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दे पर अड़े हैं. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान अपना नियंत्रण चाहता है, तो अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहता है.

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US-Iran ceasefire 2026 : खाड़ी क्षेत्र में दो सप्ताह का युद्ध विराम बुधवार यानी 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. ऐसे में पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि आखिर इस युद्ध विराम के बाद क्या होने वाला है? क्या एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल अटैक शुरू होगा और निर्दोष लोगों की जान जाएगी?

कब शुरू हुआ था युद्धविराम?

28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध में 8 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा हुई थी. उस वक्त यह कहा गया था कि दो सप्ताह तक सीजफायर रहेगा और दोनों पक्ष बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की कोशिश करेंगे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता की, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और उससे जुड़े विवाद को निपटाने का कोई रास्ता नहीं निकला. हालांकि सीधे सैन्य टकराव को रोकने और बातचीत के लिए रास्ता अभी खुला है.

युद्ध विराम की अवधि समाप्त हुई तो क्या होगा?

युद्ध विराम की अवधि 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है, लेकिन इस बात की संभावना कम ही नजर आ रही है कि दोनों पक्ष अब एक बार फिर युद्ध की आग में एक दूसरे को झोकेंगे. बावजूद इसके 22 अप्रैल को क्या होगा, इसे लेकर कयासबाजी का दौर जारी है. तीन संभावनाएं जताई जा रही है, जो इस प्रकार है-

  • बढ़ सकती है युद्धविराम की अवधि
  • क्षेत्र में तनाव रहेगा, लेकिन अब उस तरह से युद्ध नहीं होगा
  • फिर से शुरू होगा संघर्ष

ईरान युद्ध की अभी जो स्थिति है, उसमें अगर दोनों पक्ष बातचीत जारी रखते हैं तो बहुत संभव है कि सीजफायर की अवधि को बढ़ाया जाए. इसका परिणाम यह हो सकता है कि क्षेत्र में तनाव बना रहे, लेकिन युद्ध अब पहले की तरह ना हो. एक और संभावना भी है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है, वह है कि संघर्ष एक बार फिर शुरू हो सकता है. यह स्थिति तब बनेगी, जब परमाणु कार्यक्रम पर सहमति ना बने या फिर कोई कोई बड़ी सैन्य घटना हो जाए और स्थिति ज्यादा बिगड़ जाए.

ईरान युद्ध में क्या पेच फंसा है, युद्ध क्यों नहीं रूक रहा?

ईरान युद्ध की सबसे बड़ी वजह है ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम को बढ़ाना. अमेरिका को इस बात से परेशानी है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, यानी अपने परमाणु कार्यक्रम को बढ़ा रहा है. वहीं ईरान अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है, साथ ही वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण को भी स्थापित करना चाहता है, जिसे अमेरिका मान नहीं रहा है. ईरान का कहना है कि वह इस प्रमुख समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा, क्योंकि यह उसका प्रभाव क्षेत्र है. इस प्रमुख समुद्री मार्ग को अमेरिका ईरान के प्रभाव में जाने नहीं देना चाहता है.

अभी क्या है स्थिति?

अमेरिका लगातार यह कह रहा है कि बातचीत चल रही है और ईरान अमेरिकी शर्तों पर युद्ध समाप्त कर देगा, लेकिन ईरान लगातार अमेरिकी दबाव को मानने से इनकार कर रहा है. एक महीना लगातार युद्ध लड़ने के बाद अब दोनों ही देश सीधे युद्ध से बचना तो चाह रहे हैं, लेकिन दोनों ही झुकने के मूड में भी नजर नहीं आते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को जॉन फ्रेडरिक्स मीडिया नेटवर्क पर कहा कि तेहरान बातचीत करेगा लेकिन उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन तेहरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने की इजाजत नहीं देगा. वहीं ईरान के सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को कहा कि अभी तक कोई भी ईरानी डेलीगेशन अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गया है. इससे यह स्पष्ट है कि युद्धविराम की अवधि बढ़ेगी या नहीं इसे लेकर स्पष्टता नहीं है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है. शनिवार को इसे कुछ समय के लिए इसे खोला गया था, लेकिन स्ट्रेट में या उसके पास के जहाजों, जिसमें एक टैंकर भी शामिल था, को तेहरान द्वारा निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद इसे जल्दी ही फिर से बंद कर दिया गया. ईरान ने दो जहाजों पर फायरिंग भी की, जिसे ट्रंप ने सीजफायर का उल्लंघन भी बताया था.

तनाव बना रहा, तो भारत में बढ़ेगी महंगाई

खाड़ी क्षेत्र में तनाव की वजह से अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो भारत में तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी. दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई यहीं से गुजरती है, अगर यहां आवागमन बाधित रहा, तो तेल की सप्लाई रूक जाएगाी और भारत पर इसका बहुत ज्यादा असर होगा, क्योंकि भारत अपना 85% तेल यहीं से आयात करता है. अगर तनाव बढ़ता है तो पेट्रोल डीजल की कीमत में 5-15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी संभव है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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