महिला आरक्षण: जब पक्ष-विपक्ष दोनों समर्थक, तो 543 सीटों पर क्यों लागू नहीं हो सकता कानून?

Published by :Rajneesh Anand
Published at :18 Apr 2026 5:59 PM (IST)
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women reservation bill lok sabha

महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव पर मतदान के दौरान पीएम मोदी और राजनाथ सिंह

women reservation bill lok sabha : महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 में कानून बन चुका है, सरकार ने इसे 17 अप्रैल 2026 को नोटिफाई भी कर दिया है. बावजूद इसके कानून का लाभ महिलाओं को अबतक नहीं मिल पाया है.

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women reservation bill lok sabha : महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में लाया गया बिल शुक्रवार को गिर गया. अब सरकार और विपक्ष दोनों एक दूसरे को महिला विरोधी बता रहे हैं. ऐसे में आम जनता यह सोच रही है कि जब सरकार और विपक्ष दोनों ही महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में एकमत हैं, तो फिर आखिर संशोधन बिल गिरा क्यों? एक और सवाल यह भी है कि आखिर वर्तमान स्थिति में यानी 543 लोकसभा सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता है?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का बिल क्यों गिरा?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लोकसभा चुनाव 2029 में लागू करवाने के उद्देश्य से सरकार इसमें संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई थी. सरकार की मंशा यह थी कि जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण को लागू करवाने के लिए समय सीमा 2029 तय हो जाए. अभी की स्थिति में अधिनियम में इस तरह के प्रावधान हैं कि महिला आरक्षण 2029 में लागू नहीं किया जा सकता है. इसकी वजह यह है कि अभी जनगणना शुरू नहीं हुई है. जनगणना के बाद परिसीमन होगा और उसके बाद ही आरक्षण लागू हो पाएगा, इस प्रक्रिया में आरक्षण 2034 से पहले लागू हो पाएगा, इसकी संभावना बहुत कम है.

वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार अभी परिसीमन कराकर अपने प्रभाव वाले क्षेत्र यानी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लोकसभा की सीट बढ़ाना चाहती है. साथ ही जहां उसका प्रभाव सीमित है यानी दक्षिण के राज्य, वहां सीटें कम कराना चाहती है. विपक्ष इसे संघीय ढांचे पर प्रहार बता रहा है क्योंकि किसी भी राज्य को कम आंकना और किसी को ज्यादा यह संघीय ढांचे और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है. इसी वजह से विपक्ष ने एकजुट होकर मतदान किया जिसकी वजह से बिल पारित नहीं हो पाया.

543 सीटों वाली लोकसभा में क्यों नहीं लागू हो सकता है कोटा?

नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई बिल संसद में गिर गया. सबके मन में यह सवाल है कि अगर महिलाओं को आरक्षण देने के लिए दोनों पक्ष सहमत हैं, तो 543 सीटों पर ही आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता, सीट बढ़ाने की जरूरत क्या है? 2023 में संसद ने महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को बिना किसी विरोध के पास किया. अबतक यह कानून महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं दे पाया है, क्योंकि इसके लिए पहले जनगणना का होना जरूरी है. उसके बाद चुनाव क्षेत्रों को फिर से बांटने और फिर से बनाने के लिए डीलिमिटेशन यानी परिसीमन की प्रक्रिया होगी, उसके बाद ही आरक्षण लागू होगा.

विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए हमने जनगणना, फिर परिसीमन तब आरक्षण की मांग नहीं की थी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अधिनियम में यही बात है, यानी कि कानूनन आरक्षण तब ही लागू हो सकता है, जब जनगणना का नया आंकड़ा आए. यह अभी संभव नहीं है, क्योंकि जनगणना हुई नहीं है. इस परिस्थिति में सरकार संशोधन लेकर आई थी, ताकि संभवत: पुराने डेटा के आधार पर परिसीमन का काम करा लिया जाता और जब नई जनगणना के आंकड़े आते, तो सबकुछ व्यवस्थित कर लिया जाता. हालांकि सरकार ने संशोधन बिल में इसपर कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा था. बावजूद इसके विपक्ष ने इसी मुद्दे पर संशोधन का विरोध किया और बिल पारित नहीं हो पाया.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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