एसआईआर के बाद बंगाल में जारी होना शुरू हुआ वोटरलिस्ट, किन लोगों को नहीं मिलेगा वोट देने का मौका?

वोटरलिस्ट के हार्ड काॅपी के साथ अधिकारी
ECI Voter List : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह चाहती थीं कि 2025 के वोटरलिस्ट के आधार पर ही राज्य में चुनाव कराए जाएं, लेकिन चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद बने वोटरलिस्ट को जारी करने का काम शुरू कर दिया है. यह वोटरलिस्ट चुनाव तक अपडेट होंगे, ताकि कोई भी नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित ना रहे. यहां गौर करने वाली बात यह है कि कई लाख लोगों के नाम वोटरलिस्ट से काटे भी गए हैं.
ECI Voter List : स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के रिव्यू के बाद आज दोपहर बंगाल का वोटर लिस्ट क्रमबद्ध तरीके से जारी होना शुरू हो गया है. इस वोटर लिस्ट को लेकर आशंकाओं का बाजार गर्म है, क्योंकि कहा यह जा रहा है कि नये वोटरलिस्ट में 60 लाख ऐसे मतदाता होंगे, जिनका नाम तो वोटरलिस्ट में होगा, लेकिन वे मतदान नहीं कर पाएंगे. आइए समझते हैं आखिर क्या है इसकी वजह और बंगाल में वोटरलिस्ट पर इतना हंगामा क्यों है बरपा?
वे 60 लाख मतदाता कौन हैं, जिनका भविष्य अधर में है?
बंगाल में एसआईआर का काम अक्टूबर–नवंबर के महीने में शुरू हुआ था. जिन लोगों का नाम 2003 के वोटरलिस्ट में था, उन्हें तो कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन जिनका नाम उस लिस्ट में नहीं था, उनसे नागरिकता प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज मांगे गए. जब दस्तावेज मांगे गए, तो टीएमसी और अन्य पार्टियों ने यह आरोप लगाना शुरू किया कि जबरदस्ती वोटर्स के नाम काटे जा रहे हैं. ऐसे वोटर्स ने जब दस्तावेज उपलब्ध कराना शुरू किए तो कई ऐसे लोग भी सामने आए, जिनके दस्तावेज फर्जी थे. जिन लोगों के दस्तावेज या तो फर्जी पाए गए या फिर यह भी हुआ कि उनके दस्तावेज सुनवाई के दौरान तो सही पाए गए उन्हें ऑनलाइन सही तरीके से अपलोड नहीं किया गया.
इस वजह से चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने उन वोटर्स के दस्तावेजों को फिर से देखने की बात कही और उन वोटर्स के दस्तावेज न्यायिक समीक्षा में चले गए. ऐसे मतदाताओं की संख्या 60 लाख से अधिक हो गई है, जिनके दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 530 न्यायिक अधिकारी इन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों और उनपर आई आपत्तियों की जांच कर रहे हैं, चूंकि समय बहुत कम है, इसलिए अगर इन 60 लाख मतदाताओं के मामले की समीक्षा पूरी नहीं हो पाई तो वे मतदान करने से वंचित रह जाएंगे, जबकि उनका नाम मतदाता सूची में होगा. चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वोटरलिस्ट चरणबद्ध तरीके से जारी होंगे, यानी जैसे–जैसे न्यायिक समीक्षा पूरी होती जाएगी वोटरलिस्ट को अपडेट किया जाएगा.
क्या मुस्लिम बहुल इलाकों के वोटर्स पर न्यायिक समीक्षा की गाज ज्यादा गिरी है?
टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने भेदभावपूर्ण तरीके से मुस्लिम बहुल इलाकों के लोगों का नाम वोटरलिस्ट से काटने के लिए उनके दस्तावेजों पर आपत्ति दर्ज कराई है. इस संबंध में कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार पार्थो मुखोपाध्याय बताते हैं कि एसआईआर के दौरान कई फर्जी दस्तावेज सामने आए हैं, जो यह साबित करते हैं कि बंगाल में घुसपैठिए तो हैं. कुछ ऐसे उदाहरण भी मिले जिसमें पिता का सरनेम कुछ और बेटे का कुछ और था. कुछ बर्थ सर्टिफिकेट ऐसे सामने आए, जो जन्म की तारीख से पहले ही जारी किए गए थे. कई एआई द्वारा बनाए गए दस्तावेज सामने आए.
विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें
इन वजहों से कई लोगों के नाम वोटरलिस्ट से काटे गए हैं. आज नाॅर्थ कोलकाता का वोटरलिस्ट जारी हुआ है, वहां 4 लाख लोगों का नाम काटा गया है, वो मुस्लिम बहुल क्षेत्र नहीं है. नादिया में 2 लाख 70 हजार लोगों का नाम कटा है जो मुस्लिम बहुल है. हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मुर्शिदाबाद में 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख लोगों के दस्तावेजों की फिर से समीक्षा हो रही है, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है.
एसआईआर को लेकर क्या सोचता है आम आदमी?
पार्थो मुखोपाध्याय कहते हैं कि आम आदमी के बीच एसआईआर को लेकर बहुत आक्रोश नहीं है, हालांकि राजनीतिक दलों ने यह कोशिश जरूर की कि एसआईआर को ऐसा मुद्दा बना दिया जाए, जिससे आम आदमी आक्रोशित हो जाए. दक्षिण 24 परगना की एक वोटर ने बताया कि उनका नाम 2003 के वोटरलिस्ट में नहीं था. इस वजह से उन्हें परेशानी हुई. लेकिन सही दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाने के बाद उनका नाम वोटरलिस्ट में शामिल हो गया. उन्होंने बताया कि दस्तावेजों की जांच में कड़ाई की जा रही है, लेकिन अगर एक भी दस्तावेज सही प्राप्त हो जाता है, तो दिक्कत नहीं होती है.
ये भी पढ़ें : टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में कौन-कौन सी 4 टीम खेलेगी मुकाबला, जानिए समीकरण
क्या थी दिल्ली सरकार की शराब नीति, जिसने अरविंद केजरीवाल को पहुंचाया था जेल, अब हुए बरी
केरलम को हां, बांग्ला को ना क्यों? राज्यों और शहरों का नाम बदलने की प्रक्रिया और राजनीति
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




