जबलपुर क्रूज हादसे में कैसे तबाह हो गया पूरा परिवार, पढ़ें पूरी कहानी

Edited by Rajneesh Anand
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जबलपुर क्रूज हादसा

Jabalpur cruise tragedy : जबलपुर क्रूज हादसे के तीसरे दिन मरने वालों की संख्या 10 तक पहुंच गई है और 3 लोग अभी भी लापता हैं. इस हादसे में 28 लोगों की जिंदा बचा लिया गया था. इस हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई है.

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Jabalpur cruise tragedy : जबलपुर क्रूज हादसे से पूरा देश सकते में आ गया है. सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर कैसे यह दुर्घटना हुई और कैसे पलभर में हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया. जो क्रूज हादसे का शिकार हुआ्, वह मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग का था और उसपर 40 से अधिक यात्री सवार थे. इस हादसे की एक तस्वीर वायरल है, जिसमें एक मां अपने 4 साल के बेटे को अपने सीने से चिपकाए हुए है. दुर्घटना में दोनों मां-बेटे और बच्चे की नानी की मौत हो गई है.

हादसे से पहले काफी खुश था परिवार

इस हादसे में 39 वर्षीय मेरिना, उनका 4 साल का बेटा त्रिशान और 62 वर्षीय मां मधुर मैसी की मौत हो गई. मेरिना के पति प्रदीप उनकी बेटी और मेरिना के पिता इस हादसे में किसी तरह बच गए.पीटीआई न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में मेरिना की बहन ट्रीजा चौहान ने कहा कि दुर्घटना से कुछ देर पहले शाम करीब 5:30 बजे उनकी मेरिना से वीडियो कॉल हुई थी. उस समय मेरिना बेहद खुश थीं, उसके बाल हवा में उड़ रहे थे और वह क्रूज से नजारे दिखा रही थीं. लेकिन करीब 6:07 बजे आया अगला कॉल भयावह था-मेरिना रो रही थीं, चिल्ला रही थीं और कह रही थीं, हम डूब रहे है- हमें बचाओ… हमारे लिए प्रार्थना करो. इसके तुरंत बाद कॉल कट गया और फिर संपर्क नहीं हो सका.

ट्रीजा ने बताया कि पहली कॉल के दौरान उन्होंने देखा था कि नाव में मौजूद ज्यादातर लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, जो एक गंभीर लापरवाही थी.मेरिना के पति प्रदीप ने बताया कि अचानक आई तेज हवाओं से नाव बुरी तरह हिलने लगा था. जब नाव में पानी भरने लगा, तो उन्होंने लाइफ जैकेट निकालने के लिए ताला तोड़ा और उसे पहनकर अपनी बेटी के साथ वहां से निकल गए. उन्होंने देखा कि मेरिना अपने बेटे को बचाने की कोशिश कर रही हैं वह उसे लाइफ जैकेट पहना रही है, लेकिन मेरिना और उसका बेटा नहीं बच पाए.

जबलपुर क्रूज हादसे की वजह क्या थी?

अबतक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार सुरक्षा में कई खामियां थीं, जैसे टूरिस्ट को लाइफ जैकेट नहीं दिया गया था. कुछ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टूरिस्ट ऊपर चले गए थे, जिसकी वजह से जहाज में बैलेंस खराब हो गया था. तेज हवा चलने की वजह से टूरिस्ट इधर-उधर भागने लगे उसकी वजह से भी जहाज अनियंत्रित हो गया और उसमें पानी भरने लगा. हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया है कि दुर्घटना क्यों और कैसे हुई? शुरुआती जानकारी के अनुसार, मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज का संचालन जारी रहा और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. टूरिस्ट ने बताया कि हवा तेज होने पर उन्होंने क्रूज को किनारे पर ले जाने को कहा, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी और उसे पानी के बीच में ले जाया गया.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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