लियोनेल मेसी के साथ वो फोटो और ‘बिगड़ैल’ कुत्ते का काटना, जानें टॉलीगंज के ‘फर्स्ट बॉय’ अरूप विश्वास के राज

Published by :Mithilesh Jha
Published at :02 May 2026 4:29 PM (IST)
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Arup Biswas TMC Minister Biography West Bengal Election 2026

Arup Biswas TMC Minister Biography: टीएमसी सरकार के मंत्री अरूप विश्वास के जीवन के वो राज जो कम ही लोग जानते हैं. फिरहाद हकीम से नाराजगी से लेकर चुनाव के बीच कुत्ते के काटने तक, पढ़ें अरूप विश्वास पर विशेष रिपोर्ट.

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Arup Biswas TMC Minister Biography: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अरूप विश्वास एक ऐसा चेहरा हैं, जिनके लिए कहा जाता है कि उनके जीवन में ‘तस्वीर’ ही सब कुछ है. काम की तस्वीर हो या खास मौकों की, अरूप विश्वास हमेशा फ्रेम में रहना पसंद करते हैं. 61 वर्षीय अरूप विश्वास का राजनीतिक सफर न्यू अलीपुर कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू होकर ममता कैबिनेट के सबसे भरोसेमंद स्तंभ तक पहुंच चुका है. टॉलीगंज विधानसभा सीट पर साल दर साल उनका दबदबा ऐसा है कि विरोधी भी उन्हें वहां का ‘स्थायी छात्र’ और ‘फर्स्ट बॉय’ मानने लगे हैं.

जब मेसी के साथ फोटो पड़ी भारी, छोड़ना पड़ा विभाग

अरूप विश्वास के जीवन में तस्वीरों का प्रेम कभी-कभी संकट भी लेकर आता है. दिसंबर के महीने में एक ऐसा ही ‘फोटो कांड’ चर्चा में रहा. फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी के साथ तस्वीर खिंचवाने के चक्कर में ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने पसंदीदा खेल विभाग की जिम्मेदारी से हाथ धोना पड़ा.

बन गये टॉलीगंज के बेताज बादशाह

वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी तरक्की का लिफ्ट इतनी तेजी से ऊपर चढ़ा कि वह पार्षद से सीधे विधायक बन गये. वर्ष 2006 में चुनाव से महज 21 दिन पहले टिकट पाकर उन्होंने सिर्फ 526 वोटों से जीत दर्ज की थी, तब से आज तक वह टॉलीगंज के बेताज बादशाह बने हुए हैं.

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अभिमान और पद के लिए दोस्त से बंद कर दी बात

अरूप विश्वास के स्वभाव में एक मासूम जिद भी है. 2011 में जब बंगाल में परिवर्तन की सरकार आयी, तो मंत्रियों की लिस्ट में अरूप का नाम नहीं था. इससे वह इतने आहत हुए कि अपने जिगरी दोस्त फिरहाद हकीम (बॉबी) से बात करना बंद कर दिया. हालांकि, नौ महीने बाद मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मंत्री बना दिया गया. कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गयी.

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दीदी के साथ चलने से बचने का खास प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पैदल चलना बेहद पसंद है, लेकिन अरूप विश्वास को पैदल चलने से परहेज रहा है. जिले के दौरों के दौरान जब मुख्यमंत्री उन्हें साथ टहलने के लिए बुलाती थीं, तो अरूप अक्सर अपने विभाग की मीटिंग का बहाना बना लेते थे. पार्टी में उनके इस पैंतरे को मजाक में ‘दीदी के बोलो ना’ प्रोजेक्ट कहा जाता है.

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Arup Biswas: बिगड़ैल ‘बीगल’ ने काटा, तो भागे अस्पताल

अरूप विश्वास कुंवारे हैं और हाल ही में उन्होंने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक ‘बीगल’ (कुत्ते की नस्ल) पाला है. यह छोटा कुत्ता काफी शरारती है. चुनाव प्रचार के दौरान जब वह उसे गोद में लेकर लाड कर रहे थे, तो उसने उन्हें खरोंच मार दी या काट लिया. उन्होंने कोई जोखिम नहीं लिया और तुरंत अपने निर्वाचन क्षेत्र के बांगुड़ अस्पताल जाकर इंजेक्शन लगवाया.

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साल भर ‘पढ़ाई’ करते हैं टॉलीगंज के ‘पक्के’ खिलाड़ी

मजे की बात है कि हर बात पर फोटो खिंचवाने वाले अरूप की अब तक अपने पालतू कुत्ते के साथ कोई तस्वीर सामने नहीं आयी है. टॉलीगंज के ‘पक्के’ खिलाड़ी अरूप विश्वास इस बार भी अपनी चुनावी परीक्षा की तैयारी में हैं. वह पूरे साल ‘पढ़ाई’ (जनसंपर्क) करते हैं, इसलिए उन्हें नतीजों का डर नहीं सताता.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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