खास बातेंबंसल ने बंगाल चुनाव को बनाया कठिन मुकाबलायूपी के बाद अब बंगाल में बंसल का ‘मैजिक’साइलेंट वोटर पर फोकस, डाटा और फीडबैकममता बनर्जी और टीएमसी को कहां मिली चुनौती?संदेशखाली और भ्रष्टाचार का प्रभावी उपयोगबंसल की ‘चुप्पी’ और विरोधियों की बढ़ी धड़कनेंबंगाल में कमल खिलायेगा यूपी का चाणक्य? Sunil Bansal BJP Bengal Strategy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं सुनील बंसल (Sunil Bansal). भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के चुनावी प्रभारी बंसल की ‘लो-प्रोफाइल’ लेकिन सटीक रणनीति ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे में हलचल मचा दी है. बंसल ने बंगाल चुनाव को बनाया कठिन मुकाबला उत्तर प्रदेश में भाजपा को शिखर पर ले जाने वाले बंसल अब बंगाल के सियासी अखाड़े में ममता बनर्जी के ‘अजेय’ किले को ढहाने के करीब हैं. आखिर क्या है बंसल का वो ‘प्लान-बी’, जिसने इस बार के चुनाव को सबसे कड़ा बना दिया है? यूपी के बाद अब बंगाल में बंसल का ‘मैजिक’ सुनील बंसल को अमित शाह का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. उन्होंने वर्ष 2014 और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी थी. अब वही अनुभव वे बंगाल में इस्तेमाल कर रहे हैं. बंसल ने बंगाल के हर जिले में ‘बूथ मैनेजमेंट’ को इतना मजबूत किया है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भी हैरान हैं. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें साइलेंट वोटर पर फोकस, डाटा और फीडबैक बंसल का पूरा ध्यान उन मतदाताओं पर रहा, जो टीवी बहसों में नहीं दिखते, लेकिन शांति से वोट के जरिए सत्ता पलट देते हैं. वे भावनाओं की बजाय डाटा और ग्राउंड फीडबैक पर काम करने के लिए जाने जाते हैं. ममता बनर्जी और टीएमसी को कहां मिली चुनौती? टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बंसल ने उन इलाकों में बीजेपी की पैठ बना दी है, जिन्हें ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था. बंसल ने बंगाल बीजेपी के बिखरे हुए संगठन को एक सूत्र में पिरोया और अंदरूनी कलह को शांत कर केवल ‘जीत’ पर फोकस कराया. इसे भी पढ़ें : डायमंड हार्बर और मगराहट पश्चिम के 15 बूथों पर वोटिंग रद्द, 2 मई को फिर से होगी वोटिंग, देखें पूरी लिस्ट संदेशखाली और भ्रष्टाचार का प्रभावी उपयोग सुनील बंसल ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया, जिससे टीएमसी को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ा. ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के जवाब में उन्होंने केंद्र की योजनाओं के लाभार्थियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया. Sunil Bansal BJP Bengal Strategy: बंसल की ‘चुप्पी’ और विरोधियों की बढ़ी धड़कनें सुनील बंसल की खासियत यह है कि वे मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर पर्दे के पीछे काम करते हैं. टीएमसी के रणनीतिकार अब तक उनकी काट नहीं ढूंढ पाये हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 4 मई के नतीजे अगर चौंकाने वाले रहे, तो उसका पूरा श्रेय बंसल की इसी ‘साइलेंट’ रणनीति को जायेगा. इसे भी पढ़ें : बंगाल में काउंटिंग के दिन हिंसा रोकने को तैनात होंगी CAPF की 700 कंपनियां, QR कोड के बिना एंट्री नहीं बंगाल में कमल खिलायेगा यूपी का चाणक्य? ‘नबान्न’ की लड़ाई में इस बार चेहरा भले ही स्थानीय नेताओं का हो, लेकिन दिमाग और दांव-पेंच सुनील बंसल के हैं. क्या ‘यूपी का चाणक्य’ बंगाल में भी कमल खिला पायेगा? इसका फैसला 2 दिन बाद हो जायेगा. इसे भी पढ़ें बंगाल चुनाव में ‘सिंघम’ और ‘पुष्पा’ की एंट्री : अजय पाल शर्मा पर भड़के TMC के जहांगीर खान, बोले- झुकेगा नहीं… बंगाल चुनाव पर दुनिया की नजर, विदेशी मीडिया ने पूछा- अमीर होने से पहले ‘बूढ़ा’ हो जायेगा भारत? कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी को घेरा, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे, भवानीपुर में TMC-BJP कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत के बाद लाठीचार्ज कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटों से तय होगा ‘नबान्न का नवाब’, क्या दीदी का किला ढाह पायेगी भाजपा?