कौन हैं सुनील बंसल? जिनकी ‘साइलेंट’ रणनीति ने उड़ा दी ममता बनर्जी की नींद, सामने आया बीजेपी का सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’

Published by :Mithilesh Jha
Published at :01 May 2026 7:20 PM (IST)
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Sunil Bansal BJP Bengal Strategy West Bengal Election 2026

Sunil Bansal BJP Bengal Strategy: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल की बंगाल रणनीति ने ममता बनर्जी और टीएमसी को चौंका दिया है. यूपी में जीत के बाद अब बंगाल में बंसल का ‘साइलेंट’ प्रहार कैसे कर रहा बीजेपी की राह आसान, पढ़ें विशेष रिपोर्ट.

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Sunil Bansal BJP Bengal Strategy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं सुनील बंसल (Sunil Bansal). भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के चुनावी प्रभारी बंसल की ‘लो-प्रोफाइल’ लेकिन सटीक रणनीति ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे में हलचल मचा दी है.

बंसल ने बंगाल चुनाव को बनाया कठिन मुकाबला

उत्तर प्रदेश में भाजपा को शिखर पर ले जाने वाले बंसल अब बंगाल के सियासी अखाड़े में ममता बनर्जी के ‘अजेय’ किले को ढहाने के करीब हैं. आखिर क्या है बंसल का वो ‘प्लान-बी’, जिसने इस बार के चुनाव को सबसे कड़ा बना दिया है?

यूपी के बाद अब बंगाल में बंसल का ‘मैजिक’

सुनील बंसल को अमित शाह का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. उन्होंने वर्ष 2014 और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी थी. अब वही अनुभव वे बंगाल में इस्तेमाल कर रहे हैं. बंसल ने बंगाल के हर जिले में ‘बूथ मैनेजमेंट’ को इतना मजबूत किया है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भी हैरान हैं.

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साइलेंट वोटर पर फोकस, डाटा और फीडबैक

बंसल का पूरा ध्यान उन मतदाताओं पर रहा, जो टीवी बहसों में नहीं दिखते, लेकिन शांति से वोट के जरिए सत्ता पलट देते हैं. वे भावनाओं की बजाय डाटा और ग्राउंड फीडबैक पर काम करने के लिए जाने जाते हैं.

ममता बनर्जी और टीएमसी को कहां मिली चुनौती?

टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बंसल ने उन इलाकों में बीजेपी की पैठ बना दी है, जिन्हें ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था. बंसल ने बंगाल बीजेपी के बिखरे हुए संगठन को एक सूत्र में पिरोया और अंदरूनी कलह को शांत कर केवल ‘जीत’ पर फोकस कराया.

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संदेशखाली और भ्रष्टाचार का प्रभावी उपयोग

सुनील बंसल ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया, जिससे टीएमसी को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ा. ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के जवाब में उन्होंने केंद्र की योजनाओं के लाभार्थियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया.

Sunil Bansal BJP Bengal Strategy: बंसल की ‘चुप्पी’ और विरोधियों की बढ़ी धड़कनें

सुनील बंसल की खासियत यह है कि वे मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर पर्दे के पीछे काम करते हैं. टीएमसी के रणनीतिकार अब तक उनकी काट नहीं ढूंढ पाये हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 4 मई के नतीजे अगर चौंकाने वाले रहे, तो उसका पूरा श्रेय बंसल की इसी ‘साइलेंट’ रणनीति को जायेगा.

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बंगाल में कमल खिलायेगा यूपी का चाणक्य?

‘नबान्न’ की लड़ाई में इस बार चेहरा भले ही स्थानीय नेताओं का हो, लेकिन दिमाग और दांव-पेंच सुनील बंसल के हैं. क्या ‘यूपी का चाणक्य’ बंगाल में भी कमल खिला पायेगा? इसका फैसला 2 दिन बाद हो जायेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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