Budget 2026 : 2047 तक कितना जीडीपी हो, तो भारत बन सकता है विकसित राष्ट्र?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
Budget 2026-27: क्या विकसित भारत का सपना 2047 तक पूरा हो जाएगा? यह सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2047 तक इस सपने को पूरा करने का दावा किया है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 का जो बजट पेश किया है, उसमें इस सपने की झलक दिख रही है. अर्थशास्त्री कह रहे हैं, सरकार ने कोशिश की है, लेकिन अभी सफर बहुत लंबा है और सरकार को हर क्षेत्र और वर्ग तक ग्रोथ का आउटकम पहुंचाना होगा, अन्यथा संभव है कि भारत अमीर तो हो जाए, लेकिन विकसित ना बन पाए.
Budget 2026-27: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 कर्तव्यों को पूरा करने के संकल्प के साथ साल 2026–27 का बजट पेश किया है. यह बजट भारत के उस सपने की ओर इशारा करता है, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बना सकता है. इस बजट पर गौर करें, तो पता चलता है कि यह यह बजट कैपिसिटी बिल्डिंग और सबके ग्रोथ को प्रमोट करने कोशिश है. आइए समझते हैं कि इस बजट में आखिर ऐसा क्या है, जो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लेकर जा सकता है.
विकास की गति एक समान और सबके लिए विकास
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में यह स्पष्ट किया है कि सरकार ने तीन कर्तव्य को पूरा करने के लिए संकल्प लिया है. सरकार के ये तीन कर्तव्य हैं –
- आर्थिक विकास को तेज करना और उसे बनाये रखना
- जनता की उम्मीदों को पूरा करना
- सबका साथ, सबका विकास के विजन को लक्ष्य तक पहुंचाना
ये तीनों कर्तव्य अगर पूरे किए जाते हैं, तो यह कहा जा सकता है कि भारत विकसित राष्ट्र की श्रेणी में शामिल होने के लिए एक कदम आगे बढ़ा रहा है.
विकसित राष्ट्र के सपने की ओर एक कदम, लेकिन गति और बढ़ानी होगी : अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल ने प्रभात खबर के साथ खास बातचीत में बताया कि सरकार ने तीन कर्तव्य की बात कही है. सस्टेनेबल ग्रोथ, कैपिसिटी बिल्डिंग और सबके विकास की बात है. 2047 तक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंचने के लिए सरकार ने जो सपना देखा है, इस बजट को उस ओर एक प्रयास कहा जा सकता है. ग्रोथ को प्रमोट करने के लिए एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री, रोजगार, नयी तकनीक, क्लाइमेंट चेंज, एजुकेशन, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सरकार ने जिस तरह ग्रोथ की कोशिश की है, वह अच्छा है.
बावजूद इसके 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विकास की गति को ना सिर्फ तेज करना होगा, बल्कि उस गति को बनाए रखना भी होगा. सरकार ने स्किल्ड डेवलपमेंट के लिए कई यूनिवर्सिटी में इंवेस्ट करने की बात कही है, इसकी वजह यह है कि ह्यूमन रिसोर्स की कमी है, खासकार स्किल्ड रिसोर्स की. नवाचार यानी नयी तकनीक पर भी सरकार खर्च कर रही है. सेमी कंडक्टर, एआई तकनीक इसके प्रमुख उदाहरण हैं. एमएसएमई को सरकार काफी प्रमोट कर रही है, इसकी वजह यह है कि इसके जरिए काफी संख्या में रोजगार सृजित होते हैं.
ग्रोथ के लिए राज्यों को ज्यादा सशक्त करने की जरूरत
विकसित भारत के सपने को साकार करने के यह जरूरी है कि डेवलपमेंट के आउट कम को देश के हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाए. उक्त बातें अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल ने कही. ग्रोथ का बैलेंस बनाने की जरूरत है, इसके लिए लखपति दीदियों को सरकार ने टारगेट किया है. यह महिला सशक्तिकरण का बढ़िया प्रयास है. ग्रोथ हर सेक्टर में नजर आना चाहिए. इसके लिए राज्यों को ज्यादा सशक्त करने की जरूरत है, क्योंकि विकास को हर तबके तक पहुंचाने के लिए राज्यों का सहयोग बहुत जरूरी है. इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार, राज्यों को ज्यादा ग्रांट दे. राज्यों को 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रांट दिया जा रहा है, इसे और अधिक करने की जरूरत है. सरकार ने बजट में पूर्वोदय की बात कही है, जिसके तहत नाॅर्थ–ईस्ट के राज्यों को विकसित करने की बात कही गई है. यह अच्छी योजना है, लेकिन सस्टेनबल और सबका ग्रोथ तभी होगा जब और अन्य वंचित राज्यों जैसे पूर्व के अन्य राज्य बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा को ग्रांट दिया जाए और उनका विकास हो.
जीडीपी कितना हो तो भारत बन सकता है विकसित राष्ट्र?
| देश | GDP का आकार (2025) | औसत वास्तविक ग्रोथ (पिछले 5 वर्ष में) | प्रमुख विकास क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| United States (USA) | ~$30.5 ट्रिलियन | लगभग 2–3% प्रति वर्ष | सेवा क्षेत्र, तकनीक, उपभोक्ता खर्च, वित्तीय सेवाएं |
| China | ~$19.2 ट्रिलियन | लगभग 4–5% प्रति वर्ष | विनिर्माण, निर्यात, डिजिटल और तकनीकी निवेश |
| Germany | ~$4.7–5.0 ट्रिलियन | लगभग 0–1% | ऑटोमोबाइल, मशीनरी, निर्यात-आधारित उद्योग |
| India | ~$4.1–4.2 ट्रिलियन | लगभग 6–7%+ प्रति वर्ष | सेवाएं, विनिर्माण, घरेलू खपत, डिजिटल/स्टार्टअप |
भारत को अभी विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है. भारत लगभग $3.8–$3.9 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन चुका है और इसकी विकास दर 2025 में 6.5% रही जिसके 2026 में 7.4% रहने का अनुमान है. आर्थिक जगत के विशेषज्ञों की राय है कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है तो उसे अपनी विकास दर 7–8% के आसपास लगातार बनाकर रखनी होगी. साथ ही उसे समावेशी और सतत यानी लगातार और सबका विकास करना होगा, तभी यह लक्ष्य प्राप्त हो सकता है. इसके साथ ही रोजगार-आधारित विकास, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, महिला सशक्तिकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर भी काम करना होगा.
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अमेरिका की जीडीपी विकास दर है 2–3.5%
अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन उसकी विकास दर महज 2–3.5% है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका का विकास दर कम है, लेकिन उनके विकास दर की खास बात यह है कि वह लगातार एक समान बना हुआ है. इसी तरह चीन की विकास दर को देखें, तो वो अमेरिका से ज्यादा है. वहां की विकास दर 4–5% प्रति वर्ष है. जर्मनी में भी विकास दर धीमी है. इस लिहाज से अगर भारत 7–8% की विकास दर और सतत और समावेशी विकास को कायम रख पाए, तो 2047 का सपना साकार हो सकता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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