Budget 2026-27: निर्मला की सुधार एक्सप्रेस करेगी इंस्फ्राट्रक्चर में बड़ा बदलाव,  7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर; 20 नये वॉटर वे बनेंगे

Edited by Rajneesh Anand
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संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Budget 2026-27: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इंस्फ्राट्रक्चर के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य करने की घोषणा की है. उन्होंने बताया है कि देश में 7 हाईस्पीड रेल काॅरिडोर और 20 वाटर वे बनेंगे.

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Budget 2026-27:  वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश करते हुए इंस्फ्राट्रक्चर निर्माण पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश का विकास और आम जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना हमारा दायित्व है इसलिए इस दिशा में काम किया जाएगा. 

टियर 2 और टियर 3 के शहरों का विकास होगा

वित्तमंत्री ने घोषणा की कि मझोले और छोटे शहरों (टियर 2 और टियर 3) और मंदिर वाले शहरों के विकास पर फोकस किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सुधार एक्सप्रेस अपनी राह पर है और सरकार इसकी गति को बनाए रखेगी. उन्होंने कहा कि सबका साथ–सबका विकास के लिए हमें समाज के हर वर्ग तक संसाधानों और सुविधाओं को पहुंचाना होगा.

7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनेंगे

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, हम शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाएंगे. मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी, वाराणसी से सिलीगुड़ी. नेशनल वाटर वे का निर्माण किया जाएगा

20 नये वॉटर वे चालू किए जाएंगे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि एनवायरनमेंट के हिसाब से कार्गो (माल) की सस्टेनेबल आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए, पूरब में दानकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने के लिए नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए जाएंगे. अगले 5 सालों में 20 नए वॉटरवे चालू किए जाएंगे. इसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वॉटर वे 5 से होगी, जो तलचर और अंगुल के मिनरल से भरपूर इलाकों और कलिंगनगर जैसे इंडस्ट्रियल सेंटर्स को पारादीप और दमरा के पोर्ट्स से जोड़ेगा. वाराणसी और पटना में इनलैंड वॉटरवे के लिए एक शिप रिपेयर इकोसिस्टम भी बनाया जाएगा.

जोखिम गारंटी कोष की स्थापना

इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़िया बनाने के लिए कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट को बेहतर बनाने के लिए एक स्कीम शुरू की जाएगी ताकि हाई-वैल्यू, टेक्नोलॉजी-एडवांस्ड CIE की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत किया जा सके.  उन्होंने निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र के उपकरणों के प्रोत्साहन के लिए योजना लाने की बजट में घोषणा की और  घरेलू विनिर्माण को मजबूती देने का लक्ष्य तय किया है. वित्तमंत्री ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष की स्थापना का प्रस्ताव भी किया.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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