मिडिल ईस्ट में युद्ध का 11वां दिन : क्या आप जानना नहीं चाहते, क्या है स्थिति और प्रभाव?

Edited by Rajneesh Anand
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मिडिल ईस्ट में युद्ध

Iran Israel war current status :  ईरान ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें यह कहा गया था कि उसने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को समाप्त कर दिया है. ईरान ने कहा है कि वह और अधिक संख्या में 1 टन से ज्यादा वजन वाले वॉरहेड तैनात कर रहा है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को धमकी देना कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर रोके तो वह उसे 20 गुना ज्यादा तीव्रता से मारेंगे. यह दोनों बयान मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की गंभीरता को बताते हैं और यह भी बताते हैं कि अगर जल्दी ही युद्ध नहीं रूका, तो विश्व को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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Iran Israel war current status : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद छिड़े युद्ध का आज 11वां दिन है. सीएनएन के अनुसार मिडिल ईस्ट में छिड़े इस युद्ध में अबतक 1700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और अभी जिस तरह के हालात नजर आ रहे हैं उसमें ऐसा लगता नहीं है कि युद्ध अभी तुरंत समाप्त होगा. मिडिल ईस्ट विश्व का ऐसा क्षेत्र है, जहां अशांति होने से पूरे विश्व पर प्रभाव पड़ता है. खासकर भारत पर तो इस क्षेत्र में बनी अशांति का खासा असर दिखता है, इसलिए आम लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि मिडिल ईस्ट में अभी क्या हो रहा है और युद्ध के ताजा हालात क्या हैं?

क्या है मिडिल ईस्ट की स्थिति?

मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी बहुत गंभीर है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सरेंडर करने वाला नहीं है और वह लंबे युद्ध के लिए तैयार है. हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यह बयान दिया है कि उनका टारगेट पूरा हो चुका है और वे ऐसा समझते हैं कि क्षेत्र में युद्ध जल्दी ही समाप्त हो सकता है. यह बयान स्थिति के बिलकुल विपरीत नजर आ रहा है. मिडिल ईस्ट में अबतक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ है. स्कूल, जहाजों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी गई हैं, जो क्षति की भयावहता को बताते हैं.

मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा करते हुए साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डाॅ धनंजय त्रिपाठी कहते हैं कि स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है और निकट भविष्य में तो युद्ध समाप्त होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल्दी ही अगर बातचीत से समस्या का हल नहीं निकाला गया, तो इस युद्ध के वैश्विक प्रभाव दिखेंगे.

मिडिल ईस्ट में युद्ध का विश्व पर क्या दिख रहा है प्रभाव?

मिडिल ईस्ट में युद्ध से विश्व पर जो सबसे बड़ा प्रभाव दिखता है वो है तेल और गैस की कमी. इस क्षेत्र से पूरे विश्व में तेल और गैस की सप्लाई होती है. होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में रूकावट पैदा होने की वजह से पूरे विश्व में तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है. इस रास्ते से होकर विश्व की 20% तेल आपूर्ति इस युद्ध का सबसे बड़ा वैश्विक असर तेल बाजार पर पड़ा है। दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है, जो बाधित है. डाॅ धनंजय त्रिपाठी कहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की सप्लाई बंद है, इसका प्रभाव वैश्विक है. अगर यह युद्ध लंबा चला तो विश्व पर गंभीर संकट मंडराएगा. युद्ध से जान–माल की जो हानि हो रही है, वो तो हो ही रही है, जल्दी ही गंभीर तेल और गैस का संकट दिखेगा. केप ऑफ गुड होप (समुद्री मार्ग, जो दक्षिण अफ्रीका से होकर हिंद महासागर में प्रवेश करता है.) के रास्ते अगर तेल लाया जाता है, तो आयात खर्च बहुत बढ़ जाएगा और उसका असर तेल और गैस की कीमतों पर दिखेगा.  स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया ने ईंधन बचाने के उपाय शुरू कर दिए हैं.

भारत में क्या है स्थिति?

भारत में अभी तक सरकार यह कह रही है कि देश में पर्याप्त गैस और तेल है, लेकिन आम आदमी शंका में है और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिख रही हैं. लोगों के मन में शंका है कि अगर इसी तरह युद्ध चलता रहा तो पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि संभव है. डिमांड के अनुसार अगर सप्लाई नहीं हुआ, तो सरकार के सामने महंगाई पर नियंत्रण रखने की गंभीर चुनौती हो सकती है. आशंकाओं की वजह से ही स्टाॅक मार्केट गिर रहा है और लाखों का नुकसान भी हो रहा है.

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मोजतबा खामेनई को सुप्रीम लीडर चुनकर ईरान ने अमेरिका को दी चुनौती

अमेरिका के राष्ट्रपति ने अभी भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं किया है, जो यह साबित करते हैं कि अमेरिका की मंशा परिस्थितियों के अनुसार अगला कदम उठाने की है. अब जबकि ईरान ने अपना सुप्रीम लीडर चुन लिया है और वह अमेरिका की पसंद का नहीं है, संभव है कि ट्रंप अगला कदम उठाएं. ट्रंप ने मोजबता के सुप्रीम लीडर चुने जाने पर निराशा व्यक्त की थी. डाॅ धनंजय त्रिपाठी कहते हैं कि मोजतबा खामेनई का चुनाव अमेरिकी सोच के अनुसार नहीं है. सुप्रीम लीडर का चुनाव हो जाने के बाद ईरान को नया नेता मिल गया है और वे झुकने को तैयार नहीं हैं. 

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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