रिजु दत्ता ने शुभेंदु अधिकारी की जमकर की तारीफ, दीदी से पूछा-I-PAC ने कैसे किया पार्टी पर कब्जा?

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

रिजु दत्ता

Riju Dutta : टीएमसी के प्रवक्ता रहे रिजु दत्ता ने अपने बयान से बंगाल की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है. उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नीतियों को विधानसभा चुनाव में हार की वजह बताया है. उन्होंने कहा कि पार्टी ने महिलाओं की बेइज्जती की, जिसका नतीजा चुनाव परिणाम में दिखा.

विज्ञापन

Riju Dutta : तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंड प्रवक्ता रिजु दत्ता ने बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ करके नया बवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी की दखल की वजह से ही बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा रूकी.

ममता और अभिषेक जवाब दें कि I-PAC ने कैसे पूरी पार्टी पर कब्जा किया

रिजु दत्ता ने ना सिर्फ शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की, बल्कि उसने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को कठघरे में खड़ा कर दिया है. रिजु दत्ता ने एएनआई न्यूज से बात करते हुए कहा कि दीदी (ममता बनर्जी) और अभिषेक बनर्जी को इस बात की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि कैसे एक बाहरी ऑर्गनाइजेशन (I-PAC) ने पूरी पार्टी पर कब्जा कर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रतीक जैन के घर पर ईडी की रेड पड़ी, तो दीदी पार्टी का डेटा सुरक्षित करने के लिए दौड़ पड़ीं. आज दीदी के खिलाफ ईडी का केस सुप्रीम कोर्ट में है, और अगर यह उनके खिलाफ गया, तो उन्हें जेल हो सकती है. रिजू दत्ता को टीएमसी ने पार्टी की डिसिप्लिनरी कमेटी के नियमों का उल्लंघन करने और नियमों का पालन न करने के आरोप में छह साल के लिए सस्पेंड कर दिया है.

महिलाओं की बेइज्जती की वजह से हारी टीएमसी

रिजु दत्ता ने कहा कि टीएमसी की हार की बड़ी वजह महिलाओं की बेइज्जती है. उन्होंने कहा कि बंगाल की सारी औरतों ने आंख मूंदकर दीदी पर भरोसा किया, लेकिन टीएमसी के निचले लेवल के कैडर ने गांव की हिंदू औरतों पर अनगिनत अत्याचार किए, जिसकी वजह से पार्टी हारी है. आप 1500 रुपये में किसी औरत की इज्जत नहीं खरीद सकते. टीएमसी की हार महिलाओं पर जुल्मों का नतीजा है, जो उन्होंने झेले हैं.

दूसरों के किचन में क्या पक रहा है यह हम नहीं देखते : समिक भट्टाचार्य

पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रेसिडेंट समिक भट्टाचार्य ने आईपैक वाले मसले पर कहा कि यह टीएमसी का अंदरूनी मामला है.बीजेपी को उससे कोई मतलब नहीं है. हम इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं कि दूसरों के किचन में क्या पक रहा है. हमने पहले दिन से कहा है कि टीएमसी को पॉलिटिकल पार्टी नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने बंगाल को ओपन मार्केट बना दिया. जहां तक महिलाओं के समर्थन की बात है, तो क्या 1500 रुपए में महिलाओं का वोट लेने की बात कहना महिलाओं की बेइज्जती नहीं है? क्या कोई सरकार लोगों को खरीदने की सोच के साथ चलाई जा सकती है? समिक ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय हैं.

ये भी पढ़ें : सीएम विजय ने तिरुचिरापल्ली सीट से दिया इस्तीफा, पेरंबूर सीट से रहेंगे विधायक

जोसेफ विजय की बहन कीर्तना ने कहा-राजनीति के सुपर स्टार बनेंगे थलापति

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola