जोसेफ विजय की बहन कीर्तना ने कहा-राजनीति के सुपर स्टार बनेंगे थलापति
सीएम विजय और उनकी बहन कीर्तना
CM Joseph Vijay : जोसेफ विजय के तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने से प्रदेश में उत्साह का माहौल है. सबको यह उम्मीद है कि विजय ने जो वादे किए हैं, उसे वो पूरा करेंगे. विजय को बेहतर कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी मिल रही हैं. विजय ने अपने संबोधन में 200 यूनिट फ्री बिजली और महिलाओं की सुरक्षा की बात की है. उनके परिवार में भी जश्न का माहौल है.
CM Joseph Vijay : तमिलनाडु में सीएम जोसेफ विजय द्वारा कुर्सी संभालने के बाद जश्न का माहौल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजय को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. विजय के सीएम बनने से उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है.
विजय राजनीति के सुपर स्टार बनेंगे
विजय की कजिन कीर्तना ने कहा कि विजय अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं. वे हमेशा परिवार के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं. कीर्तना ने कहा कि विजय राजनीति के सुपर स्टार बनेंगे और तमिलनाडु की बेहतरी के लिए काम करेंगे. एएनआई न्यूज एजेंसी के साथ बात करते हुए कीर्तना ने कहा कि हम बहुत एक्साइटेड हैं यह देखने के लिए कि वह प्रदेश के हित में किस तरह के काम करते हैं. वे प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री बने हैं और हम उनकी सफलता पर बेहद खुश हैं. मैं उन्हें बधाई और शुभकामनाएं देती हूं.
विजय के सीएम बनने पर बहुत खुश नजर आए माता-पिता
विजय के शपथ ग्रहण समारोह में उनके माता-पिता सामने की सीट पर बैठे नजर आए. पिता एसए चंद्रशेखर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा-मेरे सपने, मेरी चाहत… मेरे बेटे ने पूरी की. उसे शपथ लेते देखकर बहुत खुशी हो रही है. मैं इस वक्त बहुत भावुक हूं, इसलिए नहीं कि मेरा बेटा सीएम बन गया, बल्कि उसके संघर्षों को याद करके खुश हूं.
तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री बने विजय
जोसेफ विजय तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री बने हैं. उन्होंने द्रविड़ पहचान की राजनीति से अलग हटकर मुद्दे उठाए और चुनाव जीतकर आए. 1967 के बाद यह पहली बार हुआ है कि डीएमके और एआईएडीएमके के अलावा कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आई है, जिसने द्रविड़ आइडेंटिटी से अलग राजनीति की. 51 वर्षीय विजय युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं और उन्होंने युवाओं के मुद्दों पर ही चुनाव लड़ा था.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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