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मिडिल ईस्ट में युद्ध से भारत में बढ़ेगी महंगाई, तेल-गैस के अलावा इन उद्योगों पर संकट

Updated at : 07 Mar 2026 6:00 PM (IST)
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Iran war news

ईरान युद्ध

Middle East Crisis 2026 : पश्चिम एशिया में एक हफ्ते से अशांति है. मिसाइलें दागी जा रही हैं और बम बरसाए जा रहे हैं. अगर यह संघर्ष लंबा चला तो भारत को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और यह परेशानी सिर्फ भारत के लिए ही नहीं होगी बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ेगी साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से भारत सहित कई अन्य देशों का भी आयात खर्च बढ़ेगा, जिसका प्रभाव गैस की कीमतों में वृद्धि के साथ अभी से दिख गया है.

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Middle East Crisis 2026 : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से पूरे पश्चिम एशिया में टकराव की स्थिति है. दोनों ही पक्ष तन कर खड़े हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकाते हुए कहा है कि उनके पास सरेंडर करने के अलावा कोई उपाय नहीं है, जबकि ईरान ने ट्रंप को जवाब दिया है कि वो ये ख्वाब अपनी कब्र तक लेकर जाएं. युद्ध के दौर में इस तरह की बयानबाजी आम है, लेकिन मिडिल ईस्ट में अशांति का असर पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगती हैं क्योंकि वहां से सप्लाई बंद हो जाती है. भारत भी कच्चे तेल के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर है, इस वजह से हमारे यहां भी परेशानी बढ़ सकती है. आइए समझते हैं अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कायम रहा, तो भारत पर क्या होगा असर.

भारत कच्चे तेल का 60% मिडिल ईस्ट से आयात करता है

भारत के दृष्टिकोण से देखें, तो मिडिल ईस्ट में अशांति से भारत को काफी परेशानी हो सकती है, इसकी वजह यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है. भारत जितने कच्चे तेल का आयात करता है उसका 60% मिडिल ईस्ट के देशों जिसमें इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान से आता है. हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना कम कर दिया है, लेकिन ईरान युद्ध से पूरा खाड़ी क्षेत्र प्रभावित है इसलिए भारत पर इसका प्रभाव साफ दिखेगा. युद्ध की वजह से इन देशों से सप्लाई प्रभावित होगी, जिसकी वजह से भारत का आयात खर्च बढ़ जाएगा और पेट्रोल– एलपीजी की कीमत में बढ़ोतरी संभव है. 7 मार्च को ही देश में एलपीजी की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम आदमी की रसोई में खर्च का बोझ बढ़ गया है. अगर स्थिति जल्दी ही सामान्य नहीं हुई, तो समस्या गंभीर हो सकती है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवागमन प्रभावित

Strait-of-Hormuz
हॉर्मुज जलडमरूमध्य

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को मिडिल ईस्ट के देशों के लिए लाइफलाइन माना जाता है. इसकी वजह यह है कि इराक, कुवैत, सऊदी अरब, कतर और ईराने जैसे देशों से तेल और गैस के टैंकर ले जाने वालों के लिए यह सबसे छोटा और संकीर्ण मार्ग है, लेकिन इस जलडमरूमध्य की गहराई इतनी अधिक है कि बड़ा से बड़ा जहाज भी यहां से आसानी से गुजर जाता है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह विश्व का प्रमुख तेल मार्ग है, जहां से विश्व का 20% तेल गुजरता है लेकिन युद्ध की वजह से इस मार्ग में बाधा आ रही है. कई जहाजों के फंसे होने की बात कही जा रही है, हालांकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि बंदिश सिर्फ इजरायल, अमेरिका और यूरोपीय देशों के जहाजों के लिए लगाया गया है, अन्य देशों के जहाजों को कोई खतरा नहीं है. यह बात सही हो सकती है, लेकिन युद्ध के जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसमें कबतक अन्य देशों के जहाजों पर बंदिश नहीं लगेगी यह बता पाना मुश्किल है. अगर जहाजों को रोका गया, तो वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई घट जाएगी जिसकी वजह से तेल की कीमत बढ़ेगी. भारत को आयात करने में परेशानी आएगी और आयात का खर्च भी बढ़ जाएगा. आयात का खर्च बढ़ेगा तो निश्चित रूप से देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमत भी बढ़ेगी.
जेएनयू के प्रोफेसर अमित सिंह ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि मिडिल ईस्ट में अशांति सिर्फ भारत के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि इससे पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख समुद्री मार्ग है, यहां आवागमन बाधित है. भारत की जहाजों को अगर रियायत देने की बात की भी जाती है, तो एक स्मूद फ्लो तो नहीं बन पाएगा, जिसकी वजह से डिमांड और सप्लाई का अंतर दिखेगा और कीमतें बढ़ेंगी.

पेट्रोल–डीजल की कीमत बढ़ी तो देश में बढ़ेगी महंगाई?

यह एक तथ्य है कि अगर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ी तो महंगाई बढ़ेगी. इसकी वजह यह है कि पेट्रोल–डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा होता है. इस वजह से व्यापारी उत्पाद की कीमतों में वृद्धि करता है और आम आदमी को हर वस्तु महंगी मिलती है. यह एक सप्लाई चेन है, जिसमें पेट्रोल–डीजल की कीमतों का अहम रोल है. खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से आम आदमी के पाॅकेट पर सीधा असर होता है, क्योंकि वह कितनी भी कटौती करे, भोजन तो करेगा ही.

ऊर्जा सेक्टर के अलावा अन्य किन क्षेत्रों पर पड़ेगा प्रभाव?


भारत पश्चिम एशिया से तेल और गैस के अलावा कई ऐसी चीजें भी खरीदता है, जो देश के महत्वपूर्ण सेक्टर के लिए बहुत जरूरी है. इन उद्योगों में शामिल है स्टील, उर्वरक, सीमेंट और पावर ट्रांसमिशन. इन उद्योगों के संचालन के लिए भारत मिडिल ईस्ट से कई तरह के कच्चे माल की खरीद करता है. चूना पत्थर, सल्फर, जिप्सम, काॅपर वाॅयर और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन भी खरीदता. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में भारत के हजारों लोग काम करते हैं, अगर युद्ध लंबा चला तो इन लोगों की नौकरी पर खतरा उत्पन्न होगा, जिससे भारत को प्रवासियों से होने वाली आय का भी नुकसान हो सकता है. प्रो अमित सिंह बताते हैं कि अमेरिका का लक्ष्य है किसी भी तरह ईरान को झुकाना. इसके लिए वह यह कोशिश करेगा कि अन्य देश उससे व्यापार बंद करे. अभी जो स्थिति बनी हुई है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि युद्ध अभी जारी रहेगा.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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