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एक नये भारतीय का उदय

Updated at : 17 Apr 2020 8:41 AM (IST)
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एक नये भारतीय का उदय

कोरोना का संकट एक अनजान शत्रु का आक्रमण है, जिसका सामना अणुबम और मिसाइलें नहीं कर सकतीं. धन बल, शस्त्रबल, सबका अहंकार धरा का धरा रह गया और पृथ्वी घरबंद हो गयी

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तरुण विजयव

रिष्ठ नेता, भाजपा

tarunvijay55555@gmail.com

कोरोना का संकट एक अनजान शत्रु का आक्रमण है, जिसका सामना अणुबम और मिसाइलें नहीं कर सकतीं. धन बल, शस्त्रबल, सबका अहंकार धरा का धरा रह गया और पृथ्वी घरबंद हो गयी. निष्कर्ष वही निकला, जो वैदिक सनातनी ऋषियों ने कहा है- जीवन और व्यवहार की शुचिता. शुचिता ही इस आक्रमण का प्रत्युत्तर है इसलिए न केवल भारत असंदिग्ध रूप से कोरोना को परास्त करेगा, बल्कि इसके बाद विश्व का नेतृत्व भी करेगा. निश्चय ही इन जीवन मूल्यों को अपनाकर हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी आस्था को माननेवाला हो, बेहतर इंसान बन सकेगा.

कोरोना से लड़ते हुए जिस प्रकार के सेवा और भाईचारे के उदाहरण मिले, वे अद्भुत ही नहीं, एक नये भारतीय का सर्वोत्तम प्रमाण और नवीन राष्ट्रीयता के उदय का उदाहरण बन गये. कोरोना ने लोगों के भीतर ममता, करुणा और परस्पर सहायता पैदा कर दिया. उत्तराखंड के एक गांव गौचर की ग्रामीण महिला देवकी देवी भंडारी ने अपनी संचित राशि दस लाख रुपये प्रधानमंत्री कोष में दान दे दी. तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र के एक किसान मोरा हनमंडलु ने अपने पचास हजार रुपये दान दे दिये. साधारण नागरिक, छोटी कॉलोनियों के निवासी, पूर्व सैनिक संगठन, दलित-सवर्ण, हिंदू-मुस्लिम सब एक हो गये. सोशल मीडिया के जहर को मत देखियेगा. सबके मन में था- कोई भूखा न रहे, कोई प्रवासी मजदूर बिना छत के न सोये, सब, सबकी चिंता करने लगे. बिहार वासियों की सहायता में भाजपा के तेजिंदर बग्गा आ गये. उधर, हरिद्वार में फंसे सुप्रिया सुले के परिचितों की सहायता के लिए रमेश पोखरियाल निशंक सक्रिय हो गये.

पुलिस का व्यवहार बदल गया, खाकी रंग वालों को शायद ही कभी कोई अच्छा कहता होगा, लेकिन कोरोना के समय असहायों की सहायता और दुष्टों के प्रति जबरदस्त कठोरता ने खाकी के प्रति नया स्नेह बढ़ा दिया है. पुलिस वाले गरीबों के घर में खाना पहुंचा रहे हैं, राशन दे रहे हैं, मजदूरों की मदद कर रहे हैं.

यह दृश्य पहले किसने कहां देखा था? दिल्ली में तेजिंदर बग्गा, कपिल मिश्रा, अद्वैता काला जैसे सामान्य लोग असामान्य हो गये और सिर्फ गुरुग्राम में से हजारों को मुफ्त भोजन ही नहीं, बल्कि उत्तरप्रदेश के गाजीपुर के गांवों तक बूढ़ी महिला को दवा पहुंचाने जैसे चमत्कार किये. पहली बार सांसद, विधायक, स्थानीय पार्षद हर दिन मोदी किचन के माध्यम से लोगों को भोजन और लोगों के घरों तक राशन तथा बीमारों की आकस्मिक आवश्यकताएं पूरी कर रहे हैं. बेंगलुरु में तेजस्वी सूर्या तथा अन्य ने असाधारण पद्धति से सेवा कार्य किया, तो तेजस्विनी अनंतकुमार के संगठन अदम्य चेतना, अक्षय पात्र, आश्रमों, मंदिरों और मठों ने नवीन भगवत पूजा को गरीबों की सेवा के माध्यम से प्रतिष्ठित किया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के हजारों कार्यकर्ता जान की परवाह न करते हुए सेवा का विश्व कीर्तिमान बनाया. सेवा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, विश्व हिंदू परिषद्, एबीवीपी जैसे सैकड़ों संघ अनुप्राणित संगठनों के दस लाख से अधिक कार्यकर्ता सहायता कार्य को एक जन आंदोलन में बदल दिया. कॉरपोरेट जगत के शिखर नेताओं रतन टाटा, अजीम प्रेमजी, इन्फोसिस, अंबानी, अडानी, बिरला, पेटीएम, बैंक, अभिनेता, सामान्य उद्योगपति और दुकानदार, खिलाड़ी- ऐसा कोई क्षेत्र और संस्थान नहीं बचा, जिसने भरसक योगदान न दिया हो. इस भारत में हिंदू, मुसलमान, ईसाई सब एक रंग हो गये.

कहीं कुछ वर्गों से और व्यवहार का भी परिचय मिला, जैसे- तब्लीगी जमात, लेकिन इसे अपवाद ही मानना चाहिए. अधिकांश मुस्लिम समाज ने तब्लीग के व्यवहार को गलत बताया और शासकीय नियमों का पालन किया. इस समय जो लोग वैमनस्य को फैला रहे हैं, वे भारत के शत्रुओं की ही सहायता कर रहे हैं. कोरोना के बाद विश्व अपनी रक्षा और पृथ्वी के कल्याण हेतु भारत के जीवन मूल्यों का अनुसरण करेगा, यह विश्वास है. भारत आज कोरोना के इलाज हेतु हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन अमेरिका से लेकर ब्राजील और इस्राइल तक को दे रहा है. इस दवा का आविष्कार भारत रसायन शास्त्री प्रोफेसर प्रफुल्ल चंद्र रे ने बंगाल में 1896 में किया था. साल 1901 में उन्होंने कोलकाता में बंगाल केमिकल्स कंपनी स्थापित की, वही कंपनी आज यह दवा बना रही है.

भारत के पास सर्वश्रेष्ठ विज्ञानी और महानतम नागरिक हैं, जिनको प्रधानमंत्री मोदी जैसे विश्वस्तरीय दृष्टा एवं गरीबों के प्रति सच्ची संवेदना रखनेवाला नेता मिला है. मोदी की वाणी का चमत्कार था कि सवा अरब देशवासी संगीत के वाद्यवृंद की तरह एक जैसा एक राग, एक धुन की तरंगों पर बहने लगे. एक लाख से ज्यादा वेंटिलेटर वाले अस्पताल, रेलवे के 2500 कोचों को चिकित्सालय में बदलना, 31 करोड़ गरीबों के खातों में 2825 करोड़ रुपये आकस्मिक मदद के भेजने, आठ करोड़ गरीब परिवारों को तीन महीने तक फ्री गैस सिलिंडर देने, गरीब कल्याण अन्न योजना, हर परिवार तक अन्न और राशन पहुंचाना- अनंत हैं यह कदम. मोदी हैं तो विश्वास है. आनेवाला समय भारत का ही है .

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तरुण विजय

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By तरुण विजय

तरुण विजय is a contributor at Prabhat Khabar.

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