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रियल्टी को राहत

Updated at : 08 Nov 2019 7:38 AM (IST)
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रियल्टी को राहत

पच्चीस हजार करोड़ रुपये की सरकारी मदद से नगदी के बड़े संकट से जूझ रहे रियल इस्टेट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है. इस पहल में 10 हजार करोड़ रुपये सरकार वैकल्पिक निवेश कोष में देगी और शेष राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व जीवन बीमा निगम का योगदान होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण […]

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पच्चीस हजार करोड़ रुपये की सरकारी मदद से नगदी के बड़े संकट से जूझ रहे रियल इस्टेट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है. इस पहल में 10 हजार करोड़ रुपये सरकार वैकल्पिक निवेश कोष में देगी और शेष राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व जीवन बीमा निगम का योगदान होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा जताया है कि आगामी दिनों में बॉन्ड के जरिये इस कोष का विस्तार हो सकता है.
ऐसी सकारात्मक पहल निवेशकों का उत्साह बढ़ा सकती है. इस नगदी से लगभग साढ़े चार लाख फ्लैटों वाले 16 सौ से अधिक लंबित आवासीय परियोजनाओं को लाभ होने की आशा है. बैंकों पर फंसे हुए कर्ज के दबाव और अनेक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के संकटग्रस्त व दिवालिया होने के कारण आवासीय परियोजनाओं को धन की आपूर्ति बाधित है. इस कारण समय पर मकान तैयार नहीं हो पा रहे हैं और खरीदारों को बेजा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि वे किश्तें भी चुका रहे हैं.
इस लिहाज से प्रस्तावित नगदी को सस्ते और मध्यम आय श्रेणी की परियोजनाओं को देने का निर्णय सराहनीय है. रियल इस्टेट सेक्टर पर खरीदारों की कमी का भी असर पड़ा है. फिलहाल देश के 30 शीर्ष के शहरों में 12.76 लाख फ्लैट बनकर तैयार हैं, पर उनकी बिक्री नहीं हो पा रही है. मुंबई महानगरीय क्षेत्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे में ही ऐसे 9.66 लाख घर खाली हैं.
अर्थव्यवस्था में सुस्ती, बैंकों से कर्ज मिलने में परेशानी और अधिक कीमत जैसे कारकों की वजह से ऐसा हो रहा है. ऐसे में कंपनियों का निवेश भी अधर में लटका हुआ है. माना जा रहा है कि मौजूदा माहौल में इन घरों को बेचने में पांच से सात साल का समय लग सकता है. नौ शहरों के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, फ्लैटों की बिक्री में लगातार गिरावट हो रही है. इस स्थिति का एक कारण रियल इस्टेट सेक्टर में 2011-12 की उछाल है. साल 2007 से 2012 के बीच परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीनें ली जा रही थीं.
ऐसे में जमीन और लागत का महंगा होना स्वाभाविक था. उस अनुपात में लोगों की आमदनी भी नहीं बढ़ी और अर्थव्यवस्था की गति भी धीमी हो गयी. पिछले दिनों ब्याज दरों में कटौती और बैंकों को नगदी मुहैया कर सरकार ने कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की है. इसके साथ इस सेक्टर में नगदी देने से लोहा, इस्पात और सीमेंट की मांग बढ़ने की उम्मीद है. रोजगार में भी बढ़त की गुंजाइश है.
लंबित परियोजनाओं के पूरा होने से उपलब्ध फ्लैटों की संख्या भी अधिक होगी, सो यह भी आशा की जा सकती है कि दामों में कुछ गिरावट आये. आर्थिकी में विभिन्न क्षेत्र विकास के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं. प्रस्तावित राशि को तुरंत मुहैया कराने का प्रयास होना चाहिए. यदि रियल्टी सेक्टर की मुश्किलें कुछ हद तक दूर होती हैं, तो इसका अच्छा असर पूरी अर्थव्यवस्था पर भी होगा.
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