समाज के विकृत रूप हैं मॉब लिंचिंग की घटनाएं

वर्तमान में फिर से मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आने लगी हैं. पिछले दिनों बिहार के सारण जिले में अनियंत्रित भीड़ का वीभत्स चेहरा सामने आया. वहीं, झारखंड के गुमला जिले के सिसकारी गांव में भी भीड़तंत्र का उग्र रूप देखने को मिला. यहां जादू-टोना के शक में चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी […]
वर्तमान में फिर से मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आने लगी हैं. पिछले दिनों बिहार के सारण जिले में अनियंत्रित भीड़ का वीभत्स चेहरा सामने आया.
वहीं, झारखंड के गुमला जिले के सिसकारी गांव में भी भीड़तंत्र का उग्र रूप देखने को मिला. यहां जादू-टोना के शक में चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी. घटनाक्रम से पहले हत्यारों ने एक खाप पंचायत बैठायी और उरांव समाज के सभी चारों व्यक्तियों पर जादू-टोना का आरोप लगाकर खूब पिटाई की. यह हमारे समाज का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है.
एक तरफ हम वैज्ञानिक युग में चांद पर जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंधविश्वास के चक्कर में निहत्थे लोगों के साथ मारपीट और मॉब लिंचिंग जैसे समाज के विकृत दृश्य सामने आ रहे हैं. जबकि, विज्ञान के अनुसार जादू-टोना मिथ्य विज्ञान है. समाज के शिक्षित वर्ग भी इसे स्वीकार कर स्वास्थ्य समाज को विकृत कर रहे हैं.
नितेश कुमार सिन्हा, एसएनएस कालेज (मोतिहारी)
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