जीवंत बने रहिए

Updated at : 23 Jan 2019 2:23 AM (IST)
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जीवंत बने रहिए

कविता विकास लेखिका kavitavikas28@gmail.com बीता हुआ समय बहुत कुछ सिखा जाता है. समय के साथ चलनेवाले खुश हैं कि उन्होंने अपनी मंजिल पाने के लिए सही कदम उठाया. मुसीबत तब होती है, जब हम समय से आगे निकलने की कोशिश में अवसाद के शिकार हो जाते हैं. समय बलवान होता है. समय अगर जख्म देता […]

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कविता विकास

लेखिका

kavitavikas28@gmail.com

बीता हुआ समय बहुत कुछ सिखा जाता है. समय के साथ चलनेवाले खुश हैं कि उन्होंने अपनी मंजिल पाने के लिए सही कदम उठाया. मुसीबत तब होती है, जब हम समय से आगे निकलने की कोशिश में अवसाद के शिकार हो जाते हैं.

समय बलवान होता है. समय अगर जख्म देता है, तो मरहम भी देता है. जाड़े के बाद गरमी ही आयेगी. चाहे लाख बारिश का इंतजार हो, आयेगी वह गरमी के बाद ही. फसल पकने का समय है, फूल खिलने का भी और जिंदा रहने का भी. समय से पहले न कुछ मिला है और न मिलेगा.

आज मनुष्य बहुत व्यस्त हो गया है. जेहन में ज्यादा से ज्यादा जानकारी भर लेने की कवायद उसे वक्त से पहले ही बूढ़ा बना रही है. आगे निकलने की होड़ में न तो वह अपने स्वाभाविक विकास पर ध्यान दे पाता है और ना उस वक्त से जुड़ी खुशियों का आनंद ले पाता है.

ठंड में ब्लोअर की गरमी का एहसास करनेवाले क्या जानें सर्दी की गुनगुनी धूप का एहसास क्या होता है. छोटे-छोटे फ्लैट्स की गजभर बालकनी से जिसने ढलती शाम या उगते सूरज की लालिमा को आंखों में नहीं बसाया, वह कैसे जानेगा कि मौसमी फल-फूल से लदी बगिया सुकून-चैन का पर्याय होती है.

समय के साथ परिवर्तन आवश्यक है, परंतु भरसक कोशिश होनी चाहिए कि यह परिवर्तन प्रकृति के सान्निध्य में उससे सामंजस्य बनाकर हो. बहुत सारे रोगों का कारण ही प्रकृति से दूर हो जाना है. तेजी से जीवन का हर जंग जीतने की कोशिश में पड़ाव भी जरूरी है और हार बर्दाश्त करने की क्षमता भी.

सांसों की एक लय है. न ज्यादा तेज, न ज्यादा धीमी. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यही गति चाहिए. जिंदगी कोई रेस नहीं है. हर व्यक्ति खास है, हरेक के पास अलग-अलग हुनर हैं. कोई गीत-नृत्य में पारंगत है, तो कोई खेल-कूद में. कोई पढ़ाई में, तो कोई घर संवारने में.

टीवी रियलिटी शो ने बच्चों को कम उम्र में प्रसिद्धि तो दिलायी है, पर उनका बचपन छीन लिया है. किसी भी क्षेत्र में अव्वल आने के लिए शारीरिक क्षमता से अधिक किया गया प्रयास हमेशा बुरे परिणाम ही लाता है. असफल होने का डर अलग मनोवैज्ञानिक दबाव डालता है. इसलिए ऐसे किसी काम में स्वयं को ना झोंकिए, जो प्रकृति के विरुद्ध है. अगर आपकी प्रकृति शांत रहने की है, तो शांत भाव से ही आगे बढ़ें.

अपने स्वाभाविक लय में जीने का अलग ही सुख है. यह दिमाग को शांत रखता है, जिससे जिंदगी का सुख जुड़ा हुआ है. अगर आपने अब तक केवल दूसरों की बुराइयां गिनने में समय गुजारा है, तो अब स्वयं में बदलाव लायें. यह कठिन नहीं है, बस केवल आत्मानुशासन की जरूरत है.

एक लंबे अंतराल के बाद पता चलता है कि हमने जिंदगी उस काम में गुजार दी, जिसमें खुद अपना ही अहित हुआ. तो आनेवाले समय में इस बात का ख्याल रहे कि अच्छे और नेक काम में समय बीते. यही जिंदगी का फलसफा है. जीवन का मजा जीवंत रहने में है, इसलिए अपने स्वभाव के अनुसार जीवंत बने रहिए.

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