रामराज्य पर अनावश्यक विवाद

प्रभात खबर के 8 मई 2014 के अंक में प्रकाशित शीतला सिंह के लेख ‘आखिर रामराज्य का नारा किया बुलंद’ पढ़ने से लगता है कि कुछ लोग अपनी बुद्धि का उपयोग अकारण विवाद खड़ा करने में कर रहे हैं. मोदी से खीज, नाराजगी और नफरत की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए उन्होंने जो आधार […]
प्रभात खबर के 8 मई 2014 के अंक में प्रकाशित शीतला सिंह के लेख ‘आखिर रामराज्य का नारा किया बुलंद’ पढ़ने से लगता है कि कुछ लोग अपनी बुद्धि का उपयोग अकारण विवाद खड़ा करने में कर रहे हैं. मोदी से खीज, नाराजगी और नफरत की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए उन्होंने जो आधार चुना है वह निश्चित रूप से चर्चा का विषय है.
उन्होंने रामराज्य की परिकल्पना को ही निंदा और विवाद का मुद्दा बनाने का प्रयास किया है. गांधीजी से लेकर अनेक राष्ट्रनायकों ने भिन्न-भिन्न मंचों से बारंबार ‘रामराज्य’ शब्द का प्रयोग किया है और वास्तव में कालक्रम में ‘रामराज्य’ आदर्श शासकीय व्यवस्था का पर्याय बन चुका है. वस्तुत: भाषा विज्ञान के प्राथमिक पाठ में ही बताया जाता है कि प्रयोग के कारण शब्दों के अर्थ बनते-बिगड़ते हैं. शीतला भाई जैसे वरिष्ठ पत्रकार को यह भली भांति ज्ञात होना चाहिए.
डॉ एसएस प्रसाद, रांची
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