जनता का मुद्दा बने नदियों का प्रदूषण

गंगा के मैली होते जाने की बात तो पिछले कई वर्षो से की जाती रही है, लेकिन बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ताजा रिपोर्ट सचेत करने वाली है. यह रिपोर्ट बताती है कि गंगा का पानी पीना तो दूर, नहाने के लिए भी खतरनाक है. यही स्थिति बूढ़ी गंडक और सोन नदियों की भी […]
गंगा के मैली होते जाने की बात तो पिछले कई वर्षो से की जाती रही है, लेकिन बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ताजा रिपोर्ट सचेत करने वाली है. यह रिपोर्ट बताती है कि गंगा का पानी पीना तो दूर, नहाने के लिए भी खतरनाक है. यही स्थिति बूढ़ी गंडक और सोन नदियों की भी है. बिहार में गंगा बक्सर से कहलगांव तक करीब 445 किलोमीटर की लंबाई में बहती है.
रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि बिहार में गंगा के पानी में तय मानक से कई गुना ज्यादा हानिकारक बैक्टीरिया हैं. दरअसल यह एक तरह का संकेतक है, जो यह बता रहा है कि हमने अपनी नदियों को किस हाल में ला कर छोड़ दिया है. जिन नदियों के किनारे बड़ी-बड़ी सभ्यताएं विकसित हुईं और जिनका हमारे जीवन से गहरा जुड़ाव रहा, उन्हें संरक्षित करने के बजाय हमने उन्हें इस हाल में ला छोड़ा है कि वे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं. गंगा के किनारे बसे शहरों से निकला सीवेज का गंदा पानी और औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त पानी सीधे गंगा में बह रहा है.
आखिर गंगा नदी कितना कचरा अपने साथ ढोयेगी? और ढोये भी तो कैसे, नदियों को अविरल बहने देने की बजाय हमने तो जगह-जगह मेगा पुल, बांध और सुरक्षा तटबंध बना कर नदियों के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है. गंगा और इस जैसी दूसरी नदियों की पेटी में गाद जो जमा है. जल प्रबंधन के जानकार कहते हैं कि भारी मात्र में गाद की मौजूदगी के कारण प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है और पानी में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया नहीं होती है. कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें, तो गंगा, सोन या बूढ़ी गंडक के किनारे बसे शहरों से कचरा बगैर उपचारित किये गये सीधे इन नदियों में बहाया जा रहा है.
गंगा या दूसरी नदियों के प्रदूषित होते जाने के मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि यह जनता का मुद्दा भी नहीं बन पा रहा है. कुछ संघर्षधर्मी और सामाजिक सरोकार वाले लोग जरूर अपने-अपने स्तर से इस मुद्दे पर आंदोलन और सकारात्मक पहल करते रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं. कुछ राजनीतिक दल यदा-कदा घोषणा पत्रों में इसकी चर्चा करते रहे हैं. लेकिन क्या यह जरूरी नहीं कि नदियों के पानी के प्रदूषित होते जाने का मामला आम जनता का एजेंडा बन कर सामने आये, क्योंकि नदियों का पानी तो सबके लिए है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










