भारतीय रेल की बेपटरी होती सुरक्षा

Published at :06 May 2014 5:13 AM (IST)
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भारतीय रेल की बेपटरी होती सुरक्षा

बीता अप्रैल महीना सरगर्म चुनाव-चर्चा के साथ-साथ ट्रेनों में लूट की घटनाओं के लिए भी याद किया जायेगा. अप्रैल में दिल्ली-कानपुर रेल-मार्ग लूट की घटनाओं के लिए सर्वाधिक चर्चित रहा और एक के बाद एक पुरुषोत्तम, प्रयागराज, संगम तथा लालकिला एक्सप्रेस में लूटपाट की घटनाएं हुईं. सवाल उठा कि ट्रेनों में मौजूद जीआरपी ने समय […]

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बीता अप्रैल महीना सरगर्म चुनाव-चर्चा के साथ-साथ ट्रेनों में लूट की घटनाओं के लिए भी याद किया जायेगा. अप्रैल में दिल्ली-कानपुर रेल-मार्ग लूट की घटनाओं के लिए सर्वाधिक चर्चित रहा और एक के बाद एक पुरुषोत्तम, प्रयागराज, संगम तथा लालकिला एक्सप्रेस में लूटपाट की घटनाएं हुईं. सवाल उठा कि ट्रेनों में मौजूद जीआरपी ने समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.

जवाब मिलता, इससे पहले चेन्नई में गुवाहाटी की तरफ जानेवाली ट्रेन में दो धमाके हो गये और भारतीय रेलवे की सुरक्षा-व्यवस्था के कर्णधार इस बार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं. चेन्नई रेलवे स्टेशन के हादसे का धुआं अभी लोगों के मन से छंटा भी नहीं था कि कोंकण रेलवे लाइन पर सवारी गाड़ी के कुछ डिब्बों के बेपटरी होने की खबर आयी. इस दुर्घटना में हताहतों की संख्या चौंकानेवाली है. यह चढ़ती गर्मी है, जबकि बीते जाड़े में भी ट्रेन के एसी कोच में अगलगी की खबरें आ रही थीं. निष्कर्ष यही है कि यात्रा ियों के जान-माल की सुरक्षा के मामले में भारतीय रेल-व्यवस्था, जो अपने को देश की एकता का सूत्रधार बताते नहीं थकती, फिसड्डी साबित हो रही है.

इससे भी बुरी बात यह है कि लूटपाट से लेकर बम-धमाके, अगलगी और कुहासे तथा बदइंतजामी के बीच कभी देरी तो कभी बेपटरी होने की समस्या से जूझती इस व्यवस्था की खामियां न तो बहस का विषय बनती हैं, न ही इनके निदान के लिए नीतिगत स्तर पर प्रयास के लिए व्यवस्था के ऊपरले हिस्से में कोई छटपटाहट दिखती है. रेल यात्रियों के लिए रेल यात्रा एक अनिवार्य मजबूरी का पर्याय बनते जा रही है. उन्हें अपने गंतव्य पर पहुंचने से ऐन पहले तक मन ही मन अपने भगवान को याद करते रहना पड़ता है.

माना कि भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्थाओं में एक है और देश की विशालता को देखते हुए इसकी समस्याएं भी विकराल हैं. लेकिन, इसका अर्थ यह नहीं कि सवा अरब की आबादी वाला देश अपनी विशाल परिवहन-व्यवस्था की विकराल समस्याओं के निदान ढूंढ़ने में भी अक्षम है. समय रहते यात्रा ियों के जान-माल की सुरक्षा की चिंता नहीं की गयी, तो कौन मानेगा कि भारतीय रेल देश को एकता और अखंडता के धागे में बांधनेवाली एक विकासमान और अटूट कड़ी है.

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