काला धन पर जरूरी पहल से उम्मीदें

विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जांच करने व उसे वापस लाने के उपाय सुझाने के लिए गठित विशेष जांच दल के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी शाह की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्ति एक सकारात्मक निर्णय है. न्यायालय ने 4 जुलाई, 2011 को ही इस जांच दल का गठन कर दिया था […]
विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जांच करने व उसे वापस लाने के उपाय सुझाने के लिए गठित विशेष जांच दल के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी शाह की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्ति एक सकारात्मक निर्णय है. न्यायालय ने 4 जुलाई, 2011 को ही इस जांच दल का गठन कर दिया था तथा सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीपी जीवन रेड्डी को इसका अध्यक्ष बनाया था, लेकिन उनके द्वारा कार्यभार लेने में असमर्थता जाहिर करने व केंद्र सरकार के विरोध के कारण जांच कार्य में कोई प्रगति नहीं हो सकी थी.
पिछली सुनवाई में अदालत के कड़े रुख के बाद केंद्र सरकार ने जर्मनी के लिश्तेंस्टीन बैंक में काला धन रखनेवाले 26 खाताधारकों की जानकारी भी दी है. जर्मन सरकार ने 2009 में ही इन खाताधारकों की जानकारी भारत सरकार को दे दी थी. इसी बीच भारत सरकार ने फ्रांस सरकार से मिली सूचना के आधार पर स्विट्जरलैंड सरकार पर वहां काला धन जमा किये हुए खाताधारकों की जानकारी देने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. पिछले कुछ वर्षो से काले धन का मामला देश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है, जिसके कारण हर राजनीतिक दल को अपने घोषणापत्र में इसे शामिल करना पड़ा है.
हालांकि सभी पार्टियों का जोर विदेशी बैंकों से काला धन वापस लाने पर है, जबकि काला धन को देश से बाहर जाने से रोकने पर भी ध्यान देने की जरूरत है. साथ ही, विदेशी निवेश के नाम पर काले धन की वैधानिक धन के रूप में वापसी पर भी निगरानी की आवश्यकता है. कई शोधकर्ताओं के मुताबिक, देश में निवेशित धन का लगभग 70 फीसदी वैसे केंद्रों से आता है, जिन्हें विश्व अर्थव्यवस्था में कर-स्वर्ग की संज्ञा दी जाती है. माना जाता है कि कुल विदेशी निवेश का करीब 50 फीसदी काला धन हो सकता है.
इस वर्ष जारी संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में धन की गैरकानूनी आवाजाही का 60 फीसदी वाणिज्यिक लेन-देन के द्वारा, 35 फीसदी धन हवाला व तस्करी जैसे आपराधिक लेन-देन के तरीकों और शेष 5 फीसदी धन भ्रष्टाचार की कमाई से आता-जाता है. न्यायालय की पहल काले धन पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी बहुत-कुछ किया जाना बाकी है.
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