देश की दुर्दशा में सारी पार्टियां सहभागी

एक बार एक नन्ही गौरैया का दाना मिट्टी में गिर गया, तो उसने अपनी चोंच से वहां की मिट्टी हटा कर अंत में दाना पा लिया. इससे वहां एक सूक्ष्म गड्ढा जैसा बन गया. फिर एक मुर्गी को वहां एक दाना नजर आया. उसने अपने पैरों से मिट्टी हटा कर वह दाना पा लिया. वह […]
एक बार एक नन्ही गौरैया का दाना मिट्टी में गिर गया, तो उसने अपनी चोंच से वहां की मिट्टी हटा कर अंत में दाना पा लिया. इससे वहां एक सूक्ष्म गड्ढा जैसा बन गया. फिर एक मुर्गी को वहां एक दाना नजर आया.
उसने अपने पैरों से मिट्टी हटा कर वह दाना पा लिया. वह छोटा गड्ढा थोड़ा बड़ा हो गया. एक दिन एक कुत्ते ने अपने पैरों से उस गड्ढे को थोड़ा और बड़ा किया और वहीं बैठने लगा. थोड़े दिनों बाद वहां एक गधा आया और लोटना शुरू किया.
गड्ढा थोड़ा और बड़ा हो गया. चूंकि वह जगह रास्ते के किनारे थी, सो एक दिन एक समर्थ व्यक्ति ने वहां पथिकों के लिए एक कुआं खुदवा दिया. मरने पर ईश्वर के दरबार में खाता खुला तो उन सबको बराबर पुण्य मिला क्योंकि सबने अपने सामथ्र्य के अनुसार अपना प्रयास किया था. ठीक इसी तरह देश की दुर्दशा में कोई एक पार्टी नहीं, सभी दोषी हैं.
मणींद्र मोहन सहाय, कोलकाता
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