कनाडा जा रहा एयर इंडिया का विमान, 7 घंटे हवा में रहने के बाद क्यों वापस दिल्ली लौटा?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 21 Mar 2026 11:37 AM
एयर इंडिया का विमान
Air India : 19 मार्च को एयर इंडिया का बोइंग 777 200LR वैंकूवर, कनाडा के लिए उड़ान भरता है, लेकिन 14–16 घंटे की इस उड़ान के 7 घंटे पूरे करने के बाद विमान को वापस दिल्ली लौटना पड़ा, जबकि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी. दरअसल जो बोइंग कनाडा जा रहा था, उसे वहां लैंडिंग की इजाजत नहीं थी. यह समस्या कुछ उसी तरह की थी, जैसे की आपको कार चलाने का लाइसेंस तो है, लेकिन वह सिर्फ कार के लिए वैलिड है और आप ट्रक चलाते हुए कहीं जा रहे हैं.
Air India : दिल्ली से वैंकूवर (कनाडा) जाने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट को 7 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने के बाद वापस लौटना पड़ा. फ्लाइट की वापसी के पीछे वजह यह बताया गया कि बोइंग 777 200LR एयरक्राफ्ट कनाडा के ऑपरेशन के लिए अप्रूव्ड नहीं था. अगर वह विमान कनाडा पहुंच जाता, तो उसे वहां लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलती. इसी वजह से फ्लाइट को वापस बुला लिया गया.
फ्लाइट के सभी यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित
विमान की वापसी के संबंध में एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली से वैंकूवर जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट ऑपरेशनल दिक्कत की वजह से और तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के हिसाब से दिल्ली लौट आई. इस एयरक्राफ्ट की लैंडिंग सुरक्षित रूप से हो गई. विमान के सभी यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित थे, जिन्हें बाद में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के हिसाब से वैंकूवर रवाना किया गया. उन्होंने बताया कि विमान के यात्रियों के लिए होटल में ठहरने की व्यवस्था की गई थी और उन्हें जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश की गई. एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि यह विमान 4 घंटे तक हवा में रहने के बाद चीनी एयरस्पेस के ऊपर उड़ते हुए वापस लौट आया.
आखिर बोइंग 777 200LR को वापस क्यों आना पड़ा?
एयर इंडिया के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट को बोइंग 777-300ER एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करके ऑपरेट किया जाना चाहिए था, जिसके पास कनाडा में ऑपरेशन के लिए अप्रूवल यानी स्वीकृति है. उन्होंने बताया कि बोइंग 777 200LR को कनाडा में ऑपरेट करने की इजाजत नहीं थी क्योंकि अप्रूवल बोइंग 300ER जैसे कुछ खास वेरिएंट के लिए होते हैं. अधिकारी ने बताया कि इंटरनेशनल फ्लाइट्स ऑपरेट करने के लिए कई मंजूरियों की जरूरत होती है जो गंतव्य( डेस्टिनेशन) देश के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और रेगुलेटरी जरूरतों से जुड़े एयरक्राफ्ट-स्पेसिफिक अप्रूवल शामिल हैं. यह विमान 7 घंटे तक हवा में रहा फिर इसकी वापसी हुई. यात्रियों को सुविधाएं भी देनी पड़ी, जिसमें नुकसान कुछ करोड़ का हुआ है.
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इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए क्या होना जरूरी है?
किसी इंटरनेशनल फ्लाइट को उड़ान भरने के लिए सही अप्रूवल की जरूरत होती है. साथ ही उसे सभी नियमों का पालन भी करना होता है. इंटरनेशनल फ्लाइट जब किसी एयरपोर्ट पर लैंड करता है, तो तैयारी भी उसी हिसाब से की जाती है, मसलन ग्राउंड स्टाॅफ, पार्किंग और मशीनें भी बोइंग के हिसाब से ही होती हैं. इसी वजह से विमान में सही कागजात और टेक्निकल अप्रूवल होना जरूरी होता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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