What Is Cloud Seeding: दिल्ली में पहली बार कराई जाएगी कृत्रिम बारिश, जानें क्या होती है क्लाउड सीडिंग?

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 23 Oct 2025 10:43 PM

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कृत्रिम बारिश की तैयारी

What Is Cloud Seeding: दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है. लगातार चौथे दिन वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में बनी रही. AQI 305 दर्ज किया गया है. सबसे ज्यादा आनंद विहार में एक्यूआई 410 दर्ज किया गया. वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली की सरकार ने कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी कर ली है. कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग के जरिए कराई जाएगी. इस पूरी तकनीक के बारे में जानने की कोशिश यहां करेंगे. आखिर कैसे होती है आर्टिफिशियल बारिश?

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What Is Cloud Seeding: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट कर कृत्रिम बारिश के बारे में जानकारी दी. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- “दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग के माध्यम से कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. आज विशेषज्ञों द्वारा बुराड़ी क्षेत्र में इसका सफल परीक्षण किया गया है. मौसम विभाग ने 28, 29 और 30 अक्टूबर को बादलों की उपस्थिति की संभावना जताई है. यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 29 अक्टूबर को दिल्ली पहली कृत्रिम बारिश का अनुभव करेगी. यह पहल न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने का एक वैज्ञानिक तरीका भी स्थापित करने जा रही है. सरकार का उद्देश्य है कि इस नवाचार के माध्यम से राजधानी की हवा को स्वच्छ और वातावरण को संतुलित बनाया जा सके. इस प्रयास को सफल बनाने में लगे हमारे कैबिनेट सहयोगी मनजिंदर सिंह सिरसा जी और सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं.”

क्या है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग को आसान भाषा में कहें तो यह बादलों में बारिश के बीजों को बोने की प्रक्रिया है. बीज के रूप में सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम क्लोराइड और सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है.

कैसे होती है कृत्रिम बारिश?

कृत्रिम बारिश के लिए एयरक्राफ्ट की मदद से सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम क्लोराइड और सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों को बादलों में पहुंचाया जाता है. ये पदार्थ बादल में मौजूद पानी की बूंदों को जमा देती हैं. बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े आपस में जमकर बर्फ का बड़ा गोला बन जाता है और फिर यही धरती पर गिरता है. इस पूरी प्रक्रिया को ही कृत्रिम बारिश कही जाती है.

क्या कभी भी कराई जा सकती है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग उन जगहों पर  नहीं हो सकती है, जहां एक भी बादल नहीं हैं. यानी कृत्रिम बारिश के कारण बादलों का होना जरूरी है. क्लाउड सीडिंग के लिए सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि बादल किस दिन रह सकता है. अगर है तो कितनी ऊंचाई पर है. बादल में पानी की मात्रा का भी पता लगाया जाता है. उसके बाद केमिकल का छिड़काव किया जाता है और फिर कृत्रिम बारिश होती है.

कृत्रिम बारिश से प्रदूषण खत्म हो जाएगा?

कृत्रिम बारिश कराने के लिए सही तरीके से क्लाउड सीडिंग कराना जरूरी है. अगर सही से सीडिंग नहीं कराई गई, तो प्रयोग असफल भी हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड सीडिंग ठीक ढंग से सफल रहा तो प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है.

क्लाउड सीडिंग का आविष्कार किसने किया?

क्लाउड सीडिंग का आविष्कार एक अमेरिकी रसायन और मौसम वैज्ञानिक विंसेंट जे शेफर ने किया था. उन्होंने 1946 में इस तकनीक का सफलतापूर्वक टेस्ट किया था.

भारत में सबसे पहले कब कराई गई कृत्रिम बारिश?

भारत में कई बार कृत्रिम बारिश की मदद ली गई है. भारत में सबसे पहले 1984 में इसका इस्तेमाल किया गया था. जब तमिलनाडु में भयंकर सूखा हुआ था. उस समय सरकार ने सूखा से राहत के लिए दो बार यानी 1984-87 और 1993-94 में क्लाउड सीडिंग की मदद ली थी. उसके बाद 2003 और 2004 में कर्नाटक सरकार ने भी क्लाउड सीडिंग कराई थी. महाराष्ट्र सरकार को भी 2003-04 में कृत्रिम बारिश कराना पड़ा था.

गुरुवार को दिल्ली के प्रदूषण में थोड़ी सुधार

दिल्ली में गुरुवार को सतही हवा चलने से वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शाम चार बजे 305 रहा. आनंद विहार में एक्यूआई 410 दर्ज किया गया, जो सभी निगरानी स्टेशनों में सबसे अधिक है. दिल्ली देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर रहा तथा हरियाणा का बहादुरगढ़ शीर्ष पर, जहां एक्यूआई 325 दर्ज किया गया.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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