तमिलनाडु में सत्ता पर सस्पेंस: बहुमत के दावे के बावजूद विजय को क्यों नहीं मिला राज्यपाल का बुलावा?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 09 May 2026 11:55 AM
जोसेफ विजय
TN Government Formation : तमिलनाडु में जनता ने बड़े बदलाव के लिए वोट दिया है. जनता पूरे सिस्टम को बदलना चाहती है, यही वजह है कि उसने द्रविड़ आइडेंटिटी से अलग रूख रखने वाली पार्टी टीवीके को अपना समर्थन दिया है. चूंकि टीवीके सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े से कुछ पीछे रह गई है, इसलिए प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद जारी है और उम्मीद की जा रही है कि वे राज्यपाल को आश्वस्त कर लेंगे, ताकि तमिलनाडु का जनादेश सार्थक हो सके.
TN Government Formation : विधानसभा चुनाव का परिणाम आए पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अबतक यहां इस बात को लेकर सस्पेंस बरकरार है कि किसकी बनेगी सरकार? टीवीके 108 सीट लाकर सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन बहुमत के आंकड़े को पूरा करने में जो 10 सीटें कम हैं, उसे जुगाड़ पाने में विजय के हाथ-पांव फूल रहे हैं. पिछले तीन दिन में टीवीके के नेता विजय और राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के बीच तीन मीटिंग को हो चुकी है, लेकिन अबतक विजय राज्यपाल को आश्वस्त नहीं कर पाएं हैं कि उनके पास जादुई आंकड़ा है. आइए समझते हैं आखिर कहां फंस रहा है पेच.
विजय के पास कितने विधायकों का समर्थन है?
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की. बहुमत का आंकड़ा 118 है, इस लिहाज से टीवीके बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई. चूंकि विजय ने दो सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें एक सीट छोड़ना पड़ा, तो टीवीके के कुल विधायक हुए 107. अब विजय को चाहिए 11 और विधायकों का समर्थन. कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों ने उन्हें बिना शर्त समर्थन देने की बात कही, जो डीएमके के साथी थे. इस लिहाज से आंकड़ा बना 107+5+2+2= 116 का, यानी बहुमत से दो कदम दूर. शुक्रवार को जब विजय राज्यपाल से मिले तो उनके पास कुल 118 लोगों का समर्थन पत्र नहीं था, हालांकि वीसीके (Viduthalai Chiruthaigal Katchi) एक ऐसी पार्टी है, जिसने समर्थन देने की बात कही थी, लेकिन वह अपने बयान से पलट भी रहा है.
| दल/स्थिति | सीटें | कुल संख्या |
|---|---|---|
| Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) की जीती सीटें | 108 | 108 |
| विजय ने एक सीट छोड़ी | -1 | 107 |
| Indian National Congress का समर्थन | +5 | 112 |
| Communist Party of India का समर्थन | +2 | 114 |
| Communist Party of India (Marxist) का समर्थन | +2 | 116 |
| बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा | 118 | — |
| अभी कमी | 2 विधायक | — |
| Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) | 2 | समर्थन स्पष्ट नहीं |
| अगर VCK समर्थन दे दे | +2 | 118 (बहुमत) |
किंगमेकर की भूमिका में वीसीके
वीसीके ऐसी पार्टी है, जिसके पास दो विधायक हैं और अगर वे टीवीके के साथ आ जाएं, तो बहुमत का आंकड़ा पूरा हो जाएगा. यही वजह है कि वीसीके को सत्ता की चाबी माना जा रहा है. शुक्रवार को कम्युनिस्ट पार्टियों ने यह कहा था कि वीसीके, टीवीके को अपना समर्थन देगी, लेकिन वीसीके के नेताओं ने स्पष्टता के साथ कुछ भी नहीं कहा है. कभी वे समर्थन देने की बात करते हैं, कभी चुप्पी साध लेते हैं. शुक्रवार को पार्टी का एक सोशल मीडिया पोस्ट भी आया, जिसमें उन्होंने समर्थन देने की बात कही, लेकिन बाद में पोस्ट को डिलिट कर दिया गया. इस स्थिति में वीसीके का स्टैंड क्या होगा, इसपर धुंध सी छाई हुई है.

IUML (मुस्लिम लीग) ने बदला स्टैंड
मुस्लिम लीग से टीवीके ने समर्थन मांगा था, शुरुआत में इन्होंने ऐसे संकेत दिए थे कि वे विजय को सरकार बनाने में समर्थन देंगे, लेकिन बाद में इन्होंने अपना स्टैंड बदल दिया और सार्वजनिक रूप से यह कह दिया कि वे विजय को सरकार बनाने में समर्थन नहीं देंगे.
राज्यपाल क्यों नहीं दे रहे सरकार बनाने का निमंत्रण?
राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर विजय से सिर्फ इतना पूछ रहे हैं कि क्या उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का लिखित समर्थन है? अगर है, तो उन्हें निमंत्रण देने में कोई परहेज नहीं है. इसकी वजह यह है कि राज्यपाल प्रदेश में स्थिर सरकार चाहते हैं, लेकिन विजय अबतक उन्हें आश्वस्त नहीं कर पाएं हैं. शुक्रवार शाम को जैसी स्थिति बन रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अब तमिलनाडु में एक बार फिर स्टारडम की सरकार नजर आएगी, लेकिन मामला फिर अटक गया है और वीसीके किंगमेकर की भूमिका में है. विजय बहुमत के लिए जरूरी और दो विधायकों का समर्थन कैसे जुटा पाएंगे यह देखने वाली बात होगी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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