जानें कोविड-19 के बाद कैसे आपके बच्चे करेंगे पढ़ाई, बदल जाएगा पूरा तरीका

New Delhi: Migrants workers along with their families walk along a road during ongoing COVID-19 lockdown, in New Delhi Monday, May 11, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI11-05-2020_000285B)
कोरोना वायरस (coronavirus in india) के संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए स्कूल और कॉलेजों को बंद (lockdown in india) रखा गया है लेकिन इस खतरनाक वायरस से कबतक लोगों को निजात मिलेगा ये काई नहीं बता पा रहा है. सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या कोरोना संक्रमण पर लगाम लगने के बाद छात्रों की पढाई का पैटर्न बदल जाएगा.
कोरोना वायरस के संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए स्कूल और कॉलेजों को बंद रखा गया है , लेकिन इस खतरनाक वायरस से कबतक लोगों को निजात मिलेगी, ये कोई नहीं बता पा रहा है. सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या कोरोना संक्रमण पर लगाम लगने के बाद छात्रों की पढाई का पैटर्न बदल जाएगा. इसको लेकर पीयर्सन द्वारा एक अध्ययन किया गया है जिसके अनुसार कोरोना वायरस महामारी और उसके कारण लागू लॉकडाउन का दौर बीतने के बाद स्कूल और कॉलेजों को स्थायी तकनीकी अवसंरचना में निवेश करना होगा जिसमें अध्यापकों का प्रशिक्षण डिजिटल वातावरण में काम करने के कौशल पर केंद्रित होगा और उच्च शिक्षण संस्थानों में परीक्षा पारंपरिक तरीकों की बजाय ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी.
लंदन स्थित पीयर्सन शैक्षिक प्रकाशन और परीक्षण के क्षेत्र में स्कूलों और छात्रों को वैश्विक स्तर पर सेवा देने वाली अग्रणी कंपनी है. कोविड-19 का दौर बीतने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में उभरने वाले आयामों पर किए गए अध्ययन में कहा गया, “कोविड-19 महामारी के कारण डिजिटल माध्यम से अधिक मात्रा में लोग पढ़ाई कर रहे हैं और कम अवधि वाले पाठ्यक्रम भी लोकप्रिय हो रहे हैं. इन बदलावों से कठिनाई तो हो रही है लेकिन इनसे शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के उदाहरण भी सामने आ रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि शैक्षणिक जगत में डिजिटल माध्यम का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है.”
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अध्ययन में कहा गया, “स्कूल और कालेजों में पढ़ाई करने के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग और अधिक किया जाएगा। शैक्षणिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्हाट्सएप्प, जूम,टीम जैसे ऐप और ईमेल का प्रयोग बढ़ेगा. अकादमिक संस्थान ऐसी अवसंरचना का विकास करेंगे जिसमें अध्यापक और छात्र अकादमिक परिसर से बाहर रहते हुए भी पठन-पाठन कर सकेंगे. संस्थान ऐसे स्थायी तकनीकी अवसंरचना में निवेश करेंगे जिसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा दी जा सकेगी.”
विभिन्न देशों में अपनाए जा रहे तरीकों के आधार पर किए गए अध्ययन के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थान परीक्षा के पारंपरिक तरीकों की बजाय ऑनलाइन माध्यम से छात्रों का मूल्यांकन करेंगे. आपको बता दें कि कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में जारी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपात परिस्थिति संबंधी प्रमुख ने कहा है कि यह अनुमान लगाना असंभव है कि वैश्विक महामारी पर कब तक नियंत्रण पाया जा सकेगा.
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