62 घंटे बाद जंगल से निकला नक्सली का शव: चाईबासा में हुआ पोस्टमार्टम, 5वीं से ही थामी थी बंदूक

Edited by Sameer Oraon
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पोस्टमार्टम कमरे के बाहर खड़े अधिकारी

Jharkhand Naxal News: पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए एक लाख के इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत पूर्ति का शव 62 घंटे बाद जंगल से बरामद कर चाईबासा लाया गया. गुरुवार आधी रात को कड़ी सुरक्षा और मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम किया गया. 5वीं कक्षा से ही नक्सली संगठन से जुड़े इसराइल पर कई हिंसक वारदातों के आरोप थे. मुठभेड़ से मात्र दो दिन पहले वह अपने गांव सांगाजटा में माता-पिता से मिलने आया था.

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Jharkhand Naxal News, पश्चिमी सिंहभूम (सुनील सिन्हा): पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत गोइलकेरा और टोंटो थाना क्षेत्र के सीमावर्ती रुतुगुटु जंगल में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया एक लाख का इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत पूर्ति अब इतिहास बन चुका है. मुठभेड़ के लगभग 62 घंटे बाद सुरक्षाबल के जवानों ने उसके शव को घने जंगलों से निकालकर सदर अस्पताल चाईबासा ले आए. गुरुवार की रात करीब 12:30 बजे अस्पताल पहुंचे शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम द्वारा मजिस्ट्रेट सदर बीडीओ अमिताभ भगत की निगरानी में किया गया. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई.

सामान ढोने वाले से बॉडीगार्ड तक का सफर

इसराइल पूर्ति के नक्सली बनने की कहानी काफी चौंकाने वाली है. बताया जाता है कि वह जब पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा था, तभी से नक्सली संगठन के संपर्क में आ गया था. शुरुआत में वह नक्सलियों का राशन और सामान ढोने का काम करता था, लेकिन धीरे-धीरे वह सक्रिय और हिंसक गतिविधियों में शामिल हो गया. उसकी वफादारी को देखते हुए उसे बड़े नक्सली नेताओं का बॉडीगार्ड भी बनाया गया था. वह पुलिस की ‘हिट लिस्ट’ में शामिल था और सरकार ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.

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अंतिम मुलाकात और मुठभेड़

मुठभेड़ की पटकथा 29 अप्रैल की सुबह 4:30 बजे लिखी गई, जब रुतुगुटु के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की गोलीबारी हुई. इस कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने इसराइल को मार गिराया. संयोग की बात ये है कि अपनी मौत से महज दो दिन पहले इसराइल अपने पैतृक गांव सांगाजटा आया था, जहां उसने अपने माता-पिता से आखिरी बार मुलाकात की थी. गांव से वापस जंगल लौटते ही वह सुरक्षाबलों के घेरे में आ गया. फिलहाल, पुलिस और सुरक्षाबलों का नक्सल विरोधी अभियान चाईबासा के सुदूरवर्ती इलाकों में लगातार जारी है.

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By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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