Ballistic Missile: भारत ने दिखाया दम, 250 किमी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल का किया सफल परीक्षण

Ballistic Missile| ANI, X, symbolic Image
Ballistic Missile: भारत ने आज यानी 23 अप्रैल 2024 को स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड के तत्वावधान में मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के एक नए संस्करण का सफल प्रक्षेपण किया गया.
Ballistic Missile: भारत ने आज यानी 23 अप्रैल 2024 को स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड के तत्वावधान में मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के एक नए संस्करण का सफल प्रक्षेपण किया गया. साथ ही इस प्रक्षेपण से मिसाइल कमांड की परिचालन क्षमता को भी साबित कर दिया गया है. इसी के साथ नई प्रौद्योगिकियों को मान्य किया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मिसाइल का परीक्षण ओडिशा अपतटीय क्षेत्र में अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया और यह आवश्यक मापदंडों पर खरी उतरी है.
Su-30 MKI से किया गया लॉन्च
न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले वायु सेना ने हवा से प्रक्षेपित इस बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह मिसाइल 250 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है. वायुसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से मिसाइल का परीक्षण किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, यह मिसाइल इजरायल की Crystal Maze 2 बैलिस्टिक मिसाइल की तरह है जिसे ROCKS के नाम से भी जाना जाता है. एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक अंडमान से एक परीक्षण रेंज में मिसाइल को युद्धक विमान Su-30 MKI से लॉन्च किया गया था.
इस मिसाइल में क्या है खास
- इस मिसाइल को इजराइल से भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था.
- यह हवा से सतह में मार करने वाली स्टैंड-ऑफ रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल है
- इसका इस्तेमाल भारतीय वायुसेना करेगी.
- यह दुश्मनों की लंबी दूरी की रडार और वायु रक्षा प्रणालियों पर हमला कर सकता है.
- दावा है कि यह उन जगहों पर भी सटीक हमला कर सकता है जहां जीपीएस काम नहीं करता है.
गुरुवार को किया था क्रूज मिसाइल का सफल प्रक्षेपण
गौरतलब है कि इससे पहले भारत ने गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र से स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्रूज मिसाइल का सफल प्रक्षेपण-परीक्षण किया था. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के मुताबिक, डीआरडीओ ने बताया कि परीक्षण के दौरान प्रक्षेपास्त्र की सभी उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्रूज मिसाइल का सफल निर्माण भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के लिए एक प्रमुख उपलब्धिकरार दिया. वहीं, डीआरडीओ ने कहा कि मिसाइल के प्रदर्शन की निगरानी के लिए एकीकृत परीक्षण रेंज ने विभिन्न स्थानों पर रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग प्रणाली और टेलीमेट्री जैसे कई रेंज सेंसर लगाए थे.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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