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अमेरिकी सैनिक अब जल्द ही कर सकेंगे भारतीय सैन्य अड्डों का इस्तेमाल, पढें क्या होगा लाभ

Updated at : 13 Apr 2016 7:46 AM (IST)
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अमेरिकी सैनिक अब जल्द ही कर सकेंगे भारतीय सैन्य अड्डों का इस्तेमाल, पढें क्या होगा लाभ

भारत व अमेरिका रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक दूसरे के सैन्य अड्डों पर रक्षा साजो-सामान संबंधी समझौते पर सहमत हो गये हैं. इसके मूर्त रूप लेने के बाद दोनों देशों के विमान, नौसैनिक पोत व सैनिक एक-दूसरे के सैन्य अड्डों पर तैनात किये जा सकेंगे.नयी दिल्ली : भारत-अमेरिका के बीच साजो-सामान […]

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भारत व अमेरिका रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक दूसरे के सैन्य अड्डों पर रक्षा साजो-सामान संबंधी समझौते पर सहमत हो गये हैं. इसके मूर्त रूप लेने के बाद दोनों देशों के विमान, नौसैनिक पोत व सैनिक एक-दूसरे के सैन्य अड्डों पर तैनात किये जा सकेंगे.

नयी दिल्ली :
भारत-अमेरिका के बीच साजो-सामान के विनिमय पर सिद्धांतत: मंगलवार को समझौता हो गया. अब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामान, अड्डे का इस्तेमाल कर सकेंगी. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि मसौदे पर सहमति बन गयी है. कुछ ही सप्ताह में समझौते पर दस्तखत हो जायेगा. यह करार विशेष रूप से मानवीय सहायता अभियानों के लिए है.

दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर पर्रिकर ने कहा कि चूंकि हमारे बीच सहयोग बढ़ा है, इसलिए इस तरह के समझौते को लागू करने के लिए हमें व्यवस्था बनानी होगी. इस परिप्रेक्ष्य में कार्टर और मैं लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एलइएमओए करने को सहमत हैं. एलइएमओए साजो-सामान सहयोग समझौता का ही एक रूप है.

करार का मतलब सैनिकों की तैनाती नहीं : पर्रिकर

रक्षा मंत्री पर्रिकर ने समझौते से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि यह केवल मानवीय अभियानों के दौरान साजो सामान जैसे खाद्य सामग्री तथा ईंधन की आपूर्ति से जुड़ा है. इसके तहत सैनिकों की तैनाती नहीं होगी. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भी कहा कि इस करार में अमेरिकी सैनिकों की भारतीय सैन्य अड्डों पर तैनाती की बात नहीं है. यह दोनों पक्षों को किसी विशेष परिस्थिति के लिए बाध्य नहीं करेगा. दोनों ने नेपाल भूकंप का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मौकों पर यह कारगर होगा.

पाकिस्तान को एफ-16 विमानों की बिक्री से भारत नाखुश
पाक को अमेरिका द्वारा एफ-16 विमान बेचे जाने को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर के सामने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मुद्दा उठाते हुए नाराजगी जाहिर की. कार्टर ने कहा कि ये विमान आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए दिये जा रहे हैं.

समझौते की खास बातें
*दोनों पक्ष अपने-अपने रक्षा विभागों और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों के बीच मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग स्थापित करने को राजी.

*दोनों देशों ने नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कानून की जरूरत पर बल दिया.

*दोनों देशों ने पनडुब्बी से संबंधित मुद्दों को कवर करने के लिए नौसेना स्तर की वार्ता को मजबूत करने का निर्णय किया.

क्या होगा लाभ
*दोनों देशों की सेनाओं को बेहतर तरीके से समन्वय करने में सहयोग मिलेगा.

*दोनों एक -दूसरे को आसानी से ईंधन बेच सकेंगे या भारत को कल-पुर्जे मुहैया कराये जा सकेंगे.

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