सुप्रीम कोर्ट ने पोर्न साइट्स पर रोक से किया इनकार, कहा कामसूत्र की रचना वाले देश में व्यक्तिगत आजादी सर्वोच्च
Updated at : 09 Jul 2015 12:40 PM (IST)
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने पोर्न वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि पोर्न साइट्स पर पूर्ण प्रतिबंध निजता व व्यक्तिगत आजादी का उल्लंघन है. अदालत ने कहा कि कामसूत्र की रचना वाले देश में व्यक्तिगत आजादी सर्वोच्च रहनी चाहिए. कामुकता निजी इच्छा […]
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने पोर्न वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि पोर्न साइट्स पर पूर्ण प्रतिबंध निजता व व्यक्तिगत आजादी का उल्लंघन है. अदालत ने कहा कि कामसूत्र की रचना वाले देश में व्यक्तिगत आजादी सर्वोच्च रहनी चाहिए. कामुकता निजी इच्छा है.
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इंदौर निवासी वकील कमलेश वासवानी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर उस जनहित याचिका के संदर्भ में आयी है, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि जबतक गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाता है, तब तक भारत में सभी पोर्न वेबसाइट्स पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि बच्चों व महिलाएं पर होने वाले ज्यादातर अपराध की वजह पोर्न साइट्स हैं.
चीफ जस्टीस एचएल दत्तू ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कल कोई अदालत से यह गुहार लगायेगा कि हम व्यस्क है और मुझे घर की चाहरदीवारी में पोर्न साइट्स देखने से कैसे रोक सकते हैं? यह संविधान के अनुच्छेन 21 में वर्णित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.
हालांकि अदालत ने इसके बावजूद इस मामले को गंभीर बताते हुए जरूरी कदम उठाने की जरूरत बतायी. अदालत ने कहा कि केंद्र इस मामले को देख रहा है और हम यह देखेंगे कि केंद्र क्या कदम उठाता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस संबंध में कोई अंतरिम आदेश नहीं जारी कर सकता है. खंडपीठ ने इस मामले में गृहमंत्रालय को चार सप्ताह के भीतर ब्यौरा व हलफनामा दाखिल करने को कहा है.
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