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दिल्ली को यातायात जाम से मुक्त करने के लिए 16 लेन की सड़क की योजना

Updated at : 24 May 2015 12:41 PM (IST)
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दिल्ली को यातायात जाम से मुक्त करने के लिए 16 लेन की सड़क की योजना

नयी दिल्ली: राजधानी दिल्ली को यातायात जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए 16 लेन की सड़क बनाने का प्रस्ताव है. यह दिल्ली को गाजियाबाद व नोएडा से जोडेगी और इस पर 5,000 करोड रुपये खर्च किए जाएंगे. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी को पडोसी कस्बों […]

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नयी दिल्ली: राजधानी दिल्ली को यातायात जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए 16 लेन की सड़क बनाने का प्रस्ताव है. यह दिल्ली को गाजियाबाद व नोएडा से जोडेगी और इस पर 5,000 करोड रुपये खर्च किए जाएंगे.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी को पडोसी कस्बों से सिग्नल मुक्त संपर्क उपलब्ध कराने के लिए 6,000 करोड रुपये के निवेश से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे बनाने भी योजना है.
उत्तर प्रदेश में डासना तक एनएच-24 को चौडा कर 16 लेन का करने की योजना पर तीन माह में काम शुरु होगा. यह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पैकेज का हिस्सा है.
गडकरी ने कहा, ‘‘हम एनएच-24 पर 16 लेन का राजमार्ग बनाने जा रहे हैं. यह आईटीओ के पास से डासना तक होगा. इससे दिल्ली में यातायात जाम को कम किया जा सकेगा. यह राजमार्ग अक्षरधाम मंदिर से होकर जाएगा. इस परियोजना पर तीन महीने में काम शुरु होगा.’’ उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर 4,000 से 5,000 करोड रुपये की लागत आएगी. इस 16 लेन की परियोजना में छह लेन का एक्सप्रेसवे भी होगा.
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर गडकरी ने कहा, ‘‘इस बारे में फाइल वित्त मंत्रालय से कैबिनेट के पास चली गई है. मेरा अनुमान है कि कुछ माह में इस पर काम शुरु हो जाएगा.’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैं दिल्ली के मंत्री से मिला था. जिन्होंने कहा कि वह इस परियोजना का वित्तपोषण नहीं कर सकते. मैंने कहा कि हम इसका वित्तपोषण करेंगे..दिल्ली सरकार को परियोजना के लिए जमीन देनी होगी. बाद में उन्होंने कहा कि वे जमीन भी नहीं दे पाएंगे.’’
एक सूत्र ने कहा कि इस परियोजना के जुलाई, 2018 तक पूरा होने की उम्मीद है. पिछले साल दिल्ली के सांसदों ने गडकरी से मुलाकात कर दिल्ली की रिंग रोड हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले भारी वाहनों के जाम से मुक्त करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी.
मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे व वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का काम तीन साल में पूरा हो जाएगा. दोनों एक्सप्रेसवे करीब 135 किलोमीटर के होंगे.
इनकी योजना 2006 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बनाई गई थी. शीर्ष अदालत ने दिल्ली के बाहर रिंग रोड बनाने को कहा था जिससे ऐसा ट्रैफिक उससे गुजर सके जिसे दिल्ली नहीं आना है.ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे गाजियाबाद, फरीदाबाद, गौतमबुद्ध नगर (ग्रेटर नोएडा) तथा पलवल के बीच सिग्नल फ्री संपर्क उपलब्ध कराएगा. वेस्टर्न एक्सप्रेसवे कुंडली को हरियाणा में मानेसर के रास्ते पलवल से जोडेगा.
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