ePaper

अरुणा शानबाग की इच्छामृत्यु का केस मेरे जीवन के कठिनतम केसों में से एक था : काटजू

Updated at : 18 May 2015 8:04 PM (IST)
विज्ञापन
अरुणा शानबाग की इच्छामृत्यु का केस मेरे जीवन के कठिनतम केसों में से एक था : काटजू

अरुणा शानबाग की मृत्यु पर देश भर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और मीडिया में भी अरुणा का मामला छाया रहा है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सेवा निवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अरुणा शानबाग को लेकर अपनी यादें साझा की हैं. काटजू ने ट्विटर पर भी अरुणा को श्रद्धांजलि दी […]

विज्ञापन

अरुणा शानबाग की मृत्यु पर देश भर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और मीडिया में भी अरुणा का मामला छाया रहा है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सेवा निवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अरुणा शानबाग को लेकर अपनी यादें साझा की हैं. काटजू ने ट्विटर पर भी अरुणा को श्रद्धांजलि दी है और अपने ब्लॉग में अरुणा शानबाग की इच्छामृत्यु से जुड़े मामले का न्यायालय में संपादन करने का किस्सा बताया है. गौरतलब है कि पूर्व में अरुणा शानबाग की हालत को लेकर कोर्ट में इच्छामृत्यु का मामला दायर किया गया था, जिसका फैसला करने वाले न्यायाधीशों में जस्टिस काटजू प्रमुख थे.

अपने ब्लॉग में जस्टिस काटजू ने अरुणा शानबाग को लेकर कुछ ऐसा लिखा है. –

मुझसे अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट में आपके जिंदगी का सबसे कठिन केस क्या था. मैं हमेशा इस सवाल का जबाब देता हूं ‘हिंसा विरोधक संघ बनाम मिर्जापुर मोती कोरेश जमात’.

हालांकि, इसके बाद अरुणा शानबाग का केस मेरे जीवन का दूसरा कठिनतम केस था. मुझे याद है कि इस मामले के फैसले के लिए मुझे बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी. इसके लिए मुझे मेरे इंटर्न का बहुत सहयोग मिला नित्येश नटराज, वैभव रंगराजन, वेकेंटेश जो अब मद्रास हाईकोर्ट के अच्छे और बेहतरीन वकील है. उनलोगों ने दिन-रात एक कर के दुनिया भर में इच्छामृत्यु से जुड़े सारे कानूनों और फैसलों का अध्ययन किया.
इस केस के फैसले में, मैं और मेरी बहन ज्ञान सुधा मिश्रा (हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश) ने पहली बार पैसिव यूथेनेसिया ( निष्क्रिय इच्छामृत्यु) को वैधानिक किया. मैं इस समय यह सुनकर खेद महसूस कर रहा हूं कि अरुणा का मुंबई के के इ एम अस्पताल में निधन हो गया है.

गौरतलब है कि अरुणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने एक्टिव इच्छामृत्यु की याचिका को खारिज कर दिया था.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola