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निर्भया मामला : दया याचिका की वजह से 22 को टल सकती है फांसी

Updated at : 16 Jan 2020 2:03 AM (IST)
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निर्भया मामला :  दया याचिका की वजह से  22 को टल सकती है फांसी

नयी दिल्ली : दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को निर्भया कांड में दोषी मुकेश कुमार के डेथ वारंट पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि दोषियों को मौत की सजा सुनाने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई चूक नहीं है. कोर्ट ने दोषी मुकेश को निचली अदालत में अपील […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को निर्भया कांड में दोषी मुकेश कुमार के डेथ वारंट पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि दोषियों को मौत की सजा सुनाने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई चूक नहीं है. कोर्ट ने दोषी मुकेश को निचली अदालत में अपील की छूट दी है.

उधर, दिल्ली सरकार व तिहाड़ जेल के अफसरों ने हाइकोर्ट को नियमों का हवाला देते हुए सूचित किया कि निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी सकती, क्योंकि दोषी मुकेश ने दया याचिका दायर की है. इस बीच दिल्ली सरकार ने मुकेश की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की है. मुकेश के वकील ने कोर्ट में अर्जी दी है कि उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है, इसलिए फांसी की तिथि स्थगित की जाये.
सिस्टम कैंसर से जूझ रहा
निर्भया केस के दोषी मुकेश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील व तिहाड़ जेल के अफसरों ने हाइकोर्ट से कहा कि वर्तमान स्थिति में निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता. अफसरों ने कहा कि किसी केस में एक से ज्यादा दोषी को मौत की सजा सुनायी गयी है और उनमें से किसी एक ने भी दया याचिका दाखिल की है,
तो उस पर फैसला होने तक सभी की फांसी टालनी पड़ सकती है. इस पर जस्टिस मनमोहन व जस्टिस संगीता ढिंगरा सहगल की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी ने भी नियम बनाते वक्त दिमाग नहीं लगाया. पूरा सिस्टम ही कैंसर से जूझ रहा है
डेथ वारंट पर निचली अदालत के आदेश को हमारे समक्ष चुनौती देना सिर्फ एक अदालत को दूसरे के समक्ष खड़ा करने के बराबर है.
हाइकोर्ट की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि यदि आप सभी दोषियों द्वारा दया याचिका का विकल्प इस्तेमाल करने तक कार्रवाई नहीं कर सकते, तो फिर आपके नियम खराब हैं.
साथ ही स्पष्ट किया कि जब एक बार सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश की आपराधिक मामलों की अपील, समीक्षा व सुधारात्मक याचिका रद्द कर दी है और मौत की सजा की पुष्टि कर दी है, ऐसे में वह डेथ वारंट को अदालत के समक्ष चुनौती नहीं दे सकता है. यह केवल मामले को आगे खींचते रहने का तिकड़म है, जो ठीक नहीं है.
21 के बाद नये सिरे से वारंट की जरूरत
दिल्ली सरकार के वकील ने हाइकोर्ट से कहा कि यदि 21 की दोपहर तक दया याचिका पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो जेल अफसरों को नये सिरे से मृत्यु वारंट जारी कराने के लिए सेशन कोर्ट जाना होगा.
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