कालेधन वालों पर शिकंजा, 50 भारतीयों को नोटिस, स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ साझा की सूचनाएं
Updated at : 17 Jun 2019 7:00 AM (IST)
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स्विस बैंक के खाताधारकों पर बढ़ी सख्ती नयी दिल्ली/बर्न : स्विस बैंकों में अघोषित खाते रखने वाले भारतीयों के खिलाफ स्विट्जरलैंड और भारत की सरकारों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने मार्च से अब तक 50 भारतीय खाताधारकों को नोटिस जारी कर उनकी सूचना भारत सरकार को देने से पहले […]
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स्विस बैंक के खाताधारकों पर बढ़ी सख्ती
नयी दिल्ली/बर्न : स्विस बैंकों में अघोषित खाते रखने वाले भारतीयों के खिलाफ स्विट्जरलैंड और भारत की सरकारों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने मार्च से अब तक 50 भारतीय खाताधारकों को नोटिस जारी कर उनकी सूचना भारत सरकार को देने से पहले उन्हें अपील का एक अंतिम मौका दिया है.
ऐसे लोगों में ज्यादातर जमीन-जायदाद, वित्तीय सेवा, प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, पेंट, घरेलू साज-सज्जा, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के कारोबार से जुड़े कारोबारी और कंपनियां शामिल हैं. इनमें से कुछ डमी कंपनियां भी हो सकती हैं.
यह जानकारी दोनों देशों के बीच आपसी प्रशासनिक सहायता की प्रक्रिया में शमिल अधिकारियों ने दी है. स्विट्जरलैंड की सरकार कर चोरों की पनाहगाह वाली अपने देश की छवि को बदलने के लिए कुछ वर्षों से कई सुधार किये हैं. वह इस संबंध में समझौते के तहत विभिन्न देशों के साथ संदिग्ध व्यक्तियों की बैंकिंग सूचनाएं साझा करने के लिए व्यवस्था की है.
पिछले कुछ सप्ताह के दौरान भारत से संबंधित मामलों में सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया में अधिक तेजी आयी है. भारत में कालेधन का मामला राजनीतिक तौर पर संवेदनशील है. स्विटजरलैंड उसके बैंकों में खाते रखने वाले ग्राहकों की गोपनीयता बनाये रखने को लेकर एक बड़े वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है. लेकिन, कर चोरी के मामले में वैश्विक स्तर पर समझौते के बाद गोपनीयता की यह दीवार अब नहीं रही. स्विट्जरलैंड की सरकार अब सूचनाएं साझा कर रही है.
भारत से संबंधित मामलों में सूचनाओं के आदान-प्रदान में आयी तेजीउपभोक्ताओं का पूरा नाम न बता सिर्फ शुरुआती अक्षर बताये
स्विट्जरलैंड सरकार ने गजट के द्वारा जारी सार्वजनिक की गयी जानकारियों में उपभोक्ताओं का पूरा नाम न बताकर सिर्फ नाम के शुरुआती अक्षर बताये हैं.
इसके अलावा उपभोक्ता की राष्ट्रीयता और जन्म तिथि का जिक्र किया गया है. गजट के अनुसार, सिर्फ 21 मई को 11 भारतीयों को नोटिस जारी किये गये हैं. जिन दो भारतीयों का पूरा नाम बताया गया है, उनमें मई 1949 में पैदा हुए कृष्ण भगवान रामचंद और सितंबर 1972 में पैदा हुए कल्पेश हर्षद किनारीवाला शामिल हैं. हालांकि, इनके बारे में अन्य जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया है.
नाम नहीं, सिर्फ जन्म तिथि
स्विट्जरलैंड सरकार ने सूचना में नामों के शुरुआती अक्षर बताये हैं. इनमें 24 नवंबर 1944 को पैदा हुए एएसबीके, नौ जुलाई 1944 को पैदा हुए एबीकेआइ, दो नवंबर 1983 को पैदा हुई श्रीमती पीएएस, 22 नवंबर 1973 को पैदा हुई श्रीमती आरएएस, 27 नवंबर 1944 को पैदा हुए एपीएस, 14 अगस्त 1949 को पैदा हुई श्रीमती एडीएस, 20 मई 1935 को पैदा हुए एमएलए, 21 फरवरी 1968 को पैदा हुए एनएमए और 27 जून 1973 को पैदा हुए एमएमए शामिल हैं. इन नोटिसों में कहा गया है कि संबंधित ग्राहक या उनका कोई प्राधिकृत प्रतिनिधि आवश्यक दस्तावेजी सबूतों के साथ 30 दिनों के भीतर अपील करने के लिए उपस्थित हों.
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