केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा- सीबीआई की साख बचाये रखने के लिए अधिकारियों को भेजा गया छुट्टी पर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Oct 2018 11:02 AM
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा की अर्जी पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमत हो गया है. वर्मा ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने […]
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा की अर्जी पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमत हो गया है. वर्मा ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने वर्मा की इस दलील पर विचार किया कि केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले के खिलाफ दायर अर्जी पर तुरंत सुनवाई किये जाने की जरूरत है.
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सीबीआई निदेशक वर्मा ने संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है. केंद्र सरकार ने सीबीआई निदेशक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रहे विवाद को मंगलवार को गंभीरता से लिया और दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर जाने के आदेश दिये.
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इधर, सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि एम. नागेश्वर राव ने चार्ज संभाला लिया है. सीबीआई मुख्यालय का कोई भी कमरा सील नहीं किया गया है. सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ केस की जांच कर रहे सीबीआई के डिप्टी एस एके बस्सी और अतिरिक्त एस एसएस गुम को क्रमशः डिप्टी एसपी सीबीआई , एसीबी पोर्ट ब्लेयर तथा सीबीआई, एसीबी जबलपुर में स्थानांतरित कर दिया गया है
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क्या कहा केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने
सीबीआई विवाद पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सीबीआई एक प्रीमियर जांच एजेंसी है, जिसकी साख को बचाना आवश्यक है. संस्थान की अखंडता बनाये रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि एजेंसी के अंदर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है. सेंट्रल विजिलेंस कमिशन के पास सीबीआई से संबंधित भ्रष्टाचार की जांच का अधिकार है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीबीआई की एक संस्थान के तौर पर साख बचाए रखने के लिए दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा गया. मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों को जांच से अलग करना जरूरी था. आगे जेटली ने कहा कि सीबीआई में विवाद एक असाधारण स्थिति है, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. सीबीआई विवाद पर अरुण जेटली ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजने का विरोध कर रहे विपक्ष से मैं पूछना चाहता हूं कि क्या दोनों आरोपी अफसरों को ही जांच में शामिल करना चाहिए था?
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अस्थाना के खिलाफ जांच कर रही टीम में बड़े बदलाव किये
सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही टीम में बड़े बदलाव कर दिये हैं. अब इस जांच टीम में बिल्कुल नए चेहरे शामिल किये गये हैं. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी से लेकर पर्यवेक्षण स्तर तक के अधिकारी बदल दिये गये हैं. अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार की देर रात सीबीआई प्रमुख का प्रभार संभालने वाले 1986 बैच के ओड़िशा कैडर के आईपीएस अधिकारी एम. नागेश्वर राव ने पुलिस अधीक्षक के रूप में सतीश डागर को अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है. डागर इससे पहले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ मामलों की जांच कर चुके हैं. पुलिस अधीक्षक डागर की ओर से की जाने वाली जांच के पहले पर्यवेक्षण अधिकारी होंगे डीआईजी तरुण गाबा, जिन्होंने व्यापमं घोटाले के मामलों की जांच की थी. संयुक्त निदेशक स्तर पर वी. मुरुगेशन को लाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने कोयला घोटाले की जांच में मुरुगेशन पर भरोसा जताया था. पिछले जांच अधिकारी डीएसपी ए. के. बस्सी को ‘‘जनहित’ में ‘‘तत्काल प्रभाव’ से पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया है. सीबीआई की ओर से जारी आदेश में यह जानकारी दी गयी. अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से की गयी शिकायत में आरोप लगाया था कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के निर्देश पर बस्सी उनके खिलाफ ‘‘भटकाने वाली जांच’ कर रहे हैं. सरकार ने वर्मा और अस्थाना से सारे अधिकार वापस ले लिये हैं.
इनका हुआ ट्रांसफर
CBI's JD (P)Arun Kumar Sharma, A Sai Manohar, HoZ V Murugesan and DIG Amit Kumar have been transferred/posted. They were a part of the team probing the case against CBI's Rakesh Asthana. pic.twitter.com/VWgI8KgkWU
— ANI (@ANI) October 24, 2018
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