जजों के भ्रष्टाचार पर सुप्रीम कोर्ट में रार, दो सदस्यी पीठ के फैसले को सीजेआर्इ की पीठ ने पलटा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Nov 2017 11:01 AM

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में चल रही खींचतान शुक्रवार को सतह पर आ गयी, जब शीर्ष अदालत ने कथित तौर पर न्यायाधीशों से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले पर सुनवाई करने के लिए बड़ी पीठ गठित करने के दो न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश को पलट दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि पीठ […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में चल रही खींचतान शुक्रवार को सतह पर आ गयी, जब शीर्ष अदालत ने कथित तौर पर न्यायाधीशों से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले पर सुनवाई करने के लिए बड़ी पीठ गठित करने के दो न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश को पलट दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि पीठ गठित करने और मामले आवंटित करने का विशेषाधिकार सिर्फ प्रधान न्यायाधीश के पास है. यह टकराव एक पीठ के गठन में सर्वोच्चता के मुद्दे को लेकर था.

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न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने एक आदेश के जरिये गुरुवार को कथित तौर पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के प्राधिकार को कम कर दिया था. दो सदस्यीय पीठ ने न्यायाधीशों को कथित तौर पर रिश्वत दिये जाने से जुड़े मामले पर सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की एक पीठ का गठन किया था. इस मामले में ओड़िशा हार्इकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति इशरत मसरुर कुद्दुसी एक आरोपी हैं.

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर प्रधान न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं. उन्होंने एक एनजीओ और एक अधिवक्ता की आेर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के पांच शीर्ष न्यायाधीशों वाली पीठ गठित करने का आदेश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि न्यायमूर्ति मिश्रा के खिलाफ भी आरोप हैं. हालांकि, एक नाटकीय घटनाक्रम में सीजेआई ने अपनी अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया और दो न्यायाधीशों वाली पीठ के गुरुवार के आदेश को पलट दिया.

पीठ गठित करने का अधिकार केवल सीजेआर्इ के पास

पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि कोई पीठ गठित करने और मामले आवंटित करने का विशेषाधिकार सिर्फ प्रधान न्यायाधीश के पास है. पांच सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताभ राय और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर भी शामिल थे. तेजी से हुए एक घटनाक्रम के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ ने अपराह्न तीन बजे इस सवाल पर अविलंब सुनवाई शुरू की कि किसी खास मामले पर सुनवाई करने के लिए खास न्यायाधीशों की पीठ गठित करने का निर्देश कौन दे सकता है.

दो या तीन सदस्यीय पीठ खास पीठ के गठन का नहीं दे सकती आदेश

पीठ ने कहा कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जा सकता, जिसमें सीजेआई को खास संख्या वाली पीठ गठित करने का निर्देश दिया जाये. पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि न तो दो न्यायाधीशों और न ही तीन न्यायाधीशों वाली पीठ सीजेआई को कोई खास पीठ गठित करने का निर्देश दे सकती है. पांच सदस्यीय पीठ ने दो न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि यह कहना अनावश्यक है कि कोई भी न्यायाधीश खुद से किसी मामले पर विचार नहीं कर सकता है, जब तक कि उसे सीजेआई ने आवंटित नहीं किया हो, क्योंकि सीजेआई न्यायालय के मुखिया हैं.

न्याय के मंदिर में आपा खो बैठे वकील प्रशांत भूषण

मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों और याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बीच गर्मा-गरम बहस हुई. सीजेआई ने सख्त टिप्पणी में कहा कि इस आदेश (संविधान पीठ) के विपरीत दिया गया कोई भी आदेश महत्वपूर्ण नहीं रहेगा और इसे रद्द समझा जायेगा. उन्होंने मीडिया के मामले को रिपोर्ट करने से रोकने के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि वह वाक्, अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता में भरोसा रखते हैं.

अदालत के शिष्टाचार का पालन करना बेहद जरूरी

पीठ ने कहा कि अगर कानून के सिद्धांतों, न्यायिक अनुशासन और अदालत के शिष्टाचार का पालन नहीं किया गया, तो न्याय प्रशासन के साथ-साथ संस्थान के कामकाज में अराजकता और अव्यवस्था होगी. गुरुवार के आदेश से नाराज सीजेआई ने संबंधित न्यायाधीशों का नाम लिए बगैर कहा कि अदालत में रोजाना सैकड़ों मामले सूचीबद्ध होते हैं और अगर इस तरह से आदेश दिया गया, तो अदालत कामकाज नहीं कर सकती है.

जजों को धमकान के प्रयास के खिलाफ कड़ी कार्रवार्इ करने की मांग

सुप्रीम को्रट बार संघ (एससीबीए) अध्यक्ष आरएस सूरी, उपाध्यक्ष अजीत सिन्हा, सचिव गौरव भाटिया समेत इसके सदस्यों और अशोक भान, अमन सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने याचिका में लगाये गये आरोपों का जोरदार प्रतिवाद किया. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को धमकाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कड़ी कार्रवार्इ की जानी चाहिए. एससीबीए सदस्यों ने पीठ से मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध करते हुए कहा कि आतंकित करके आदेश पाने को इस अदालत को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.

अदालत में प्रशांत भूषण ने सीजेआर्इ पर लगाया केस दर्ज होने का आरोप

उसने कहा कि इस तरह के किसी भी प्रयास के खिलाफ कड़ी कार्रवार्इ किये जाने की आवश्यकता है. खचाखच भरे अदालत कक्ष में आरोपों की झड़ी लग रही थी. भूषण ने अपनी आवाज तेज करते हुए सीजेआई से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने को कहा, क्योंकि सीबीआई की प्राथमिकी में कथित तौर पर उनका भी नाम है. सीजेआई ने बदले में भूषण से प्राथमिकी की सामग्री को पढ़ने को कहा और उन्हें अपना आपा खोने के खिलाफ चेतावनी दी. भूषण के साथ याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता कामिनी जायसवाल भी थीं.

सीजेआर्इ ने प्रशांत भूषण को दी नसीहत

सीजेआई ने कहा कि मेरे खिलाफ निराधार आरोप लगाने के बावजूद हम आपको रियायत दे रहे हैं और आप उससे इंकार नहीं कर सकते. आप आपा खो सकते हैं, लेकिन हम नहीं. भूषण ने कथित तौर पर न्यायाधीशों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले की जांच के लिये एसआईटी के गठन की मांग करते हुए कहा कि सीजेआई का नाम इसमें है. भूषण एनजीओ कैंपेन फॉर जूडिशियल एकाउन्टैबिलिटी और जायसवाल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

मेरे खिलाफ नहीं है कोर्इ केसः सीजेआर्इ

सीजेआई ने कहा कि मेरे खिलाफ कौन सी प्राथमिकी. यह बकवास है. प्राथमिकी में मुझे नामजद करने वाला एक भी शब्द नहीं है. हमारे आदेश को पहले पढ़ें. मुझे दुख होता है. आप अब अवमानना के लिए जिम्मेदार हैं. भूषण ने पीठ को उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने की चुनौती दी. उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने की अनुमति दिये बिना इस तरीके से सुनवाई नहीं चल सकती.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने भी लगायी प्रशांत भूषण को फटकार

भूषण को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने भी फटकार लगायी. उन्होंने कहा कि निचली अदालतों के वर्तमान न्यायिक अधिकारी, उच्चतर न्यायपालिका के न्यायाधीशों, उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है, क्योंकि उन्हें छूट प्राप्त है. उन्होंने कहा कि उनके समक्ष दायर याचिका की सामग्री अवमाननाकारी है.

बौखलाहट में कोर्ट से बाहर निकल गये प्रशांत भूषण

भूषण सुनवाई के दौरान न्यायालय से यह आरोप लगाते हुए बाहर निकल गये कि अदालत ने सबको सुना, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है. अदालत कक्ष से निकलने के दौरान उनके साथ वस्तुत: धक्का-मुक्की हुई. सीजेआई ने कहा कि उन्होंने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन कर दिया है, क्योंकि इससे पहले दिन में इसी रिश्वतखोरी के आरोपों पर एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की दो सदस्यीय पीठ ने कहा था कि उचित आदेश के लिये मामले को सीजेआई के समक्ष रखा जाना चाहिए.

सीजेआर्इ ने प्रेस आैर अभिव्यक्ति की आजादी पर जताया भरोसा

सुनवाई के अंत में बार संघ के एक सदस्य ने मीडिया को मामले की रिपोर्टिंग करने से रोकने का आदेश देने का अनुरोध किया. उन्होंने दावा किया कि यह संस्थान की छवि को धूमिल करेगा, जो न्याय का मंदिर है. सीजेआई ने मौखिक दलील को स्वीकार करने से मना करते हुए कहा कि मेरा वाक्, अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता में भरोसा है. सीजेआई मिश्रा ने कहा कि पहली नजर में मेरी हमेशा राय रही है कि वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए. मैं प्रेस को रोकने के लिए कोई भी आदेश नहीं देने जा रहा हूं.

दो हफ्ते के बाद नयी पीठ करेगी जज रिश्वत मामले की सुनवार्इ

संविधान पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि न्यायाधीशों के नाम पर कथित तौर पर रिश्वत लिए जाने से संबंधित याचिकाओं पर दो सप्ताह बाद उचित पीठ सुनवाई करेगी. सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में कथित भ्रष्टाचार के मामले में ओड़िशा हार्इकोर्इ के पूर्व न्यायाधीश इशरत मसरुर कुद्दुसी समेत कई लोगों को आरोपी के तौर पर नामजद किया है.

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