झारखंड के पूर्व मुख्‍य सचिव राजीव गौबा ने संभाला केंद्रीय गृह सचिव का पद, जानिए उनके बारे में ...

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नयी दिल्ली : गृह सचिव राजीव महर्षि के सेवानिवृत्त होने के बाद गुरुवार को झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव गौबा ने यह पद संभाल लिया. गौबा का दो साल का निश्चित कार्यकाल होगा. 1982 बैच के झारखंड कैडर के 58 वर्षीय अधिकारी गौबा को करीब दो महीने पहले गृह सचिव नियुक्त किया गया […]

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नयी दिल्ली : गृह सचिव राजीव महर्षि के सेवानिवृत्त होने के बाद गुरुवार को झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव गौबा ने यह पद संभाल लिया. गौबा का दो साल का निश्चित कार्यकाल होगा. 1982 बैच के झारखंड कैडर के 58 वर्षीय अधिकारी गौबा को करीब दो महीने पहले गृह सचिव नियुक्त किया गया था. तब से वह गृह मंत्रालय में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के रूप में कार्य कर रहे थे. इससे पहले गौबा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवाएं दे रहे थे.

पहले वह अतिरिक्त सचिव के रूप में गृह मंत्रालय में काम कर चुके हैं. उस समय वह कई अन्य जिम्मेदारियों के साथ वामपंथी उग्रवाद से संबंधित विभाग का कामकाज देखते थे. गौबा के पास केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के स्तर पर और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में नीति निर्माण और कार्यक्रम क्रियान्वयन में वरिष्ठ पदों पर रहने का व्यापक अनुभव है. साल 1958 में पंजाब में जन्मे गौबा ने पटना विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में स्नातक किया था.

पिछले साल केंद्र सरकार में आने से पहले वह 15 महीने तक झारखंड में मुख्य सचिव रहे. गौबा ने केंद्र सरकार के गृह, रक्षा, वित्त और पर्यावरण तथा वन मंत्रालयों में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं. चार साल तक वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत के प्रतिनिधि रहे. केंद्रीय गृह सचिव के रुप में राजीव गौबा आंतरिक सुरक्षा, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में उग्रवाद, मध्य तथा पूर्वी भारत में माओवाद की समस्या समेत अन्य मुद्दों को देखेंगे.

दूसरी ओर राजीव महर्षि को जम्‍मू कश्‍मीर का राज्‍यपाल बनाने की अटकलें लगायी जा रही थी. महर्षि ने इस अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह सेवानिवृत्त होने के बाद गुरुवार को अपने गृह नगर जयपुर जायेंगे. जब महर्षि से उनके जम्मू कश्मीर का अगला राज्यपाल बनने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं कल दोपहर जयपुर जाऊंगा.’ महर्षि ने यह भी कहा कि उन्हें जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा के दूसरे कार्यकाल के पूरा होने से कुछ महीने पहले उनके इस्तीफे की संभावना पर कोई जानकारी नहीं है.

कौन हैं राजीव गौबा

राजीव गौबा 1982 बैच के झारखंड कैडर के आइएएस अधिकारी हैं. गौबा की प्रारंभिक शिक्षा रांची में हुई है. वे भौतिकी विषय में गोल्ड मेडलिस्ट हैं. सिविल सर्विसेज एक्जाम में उन्होंने सातवां रैंक प्राप्त किया था. राजीव गौबा का झारखंड से पुराना संबंध रहा है. उनके पिता 60 के दशक में एजी ऑफिस, रांची में कार्यरत थे. गौबा की आरंभिक शिक्षा रांची में ही हुई थी.

आइएएस बनने के बाद वह जामताड़ा में एसडीओ व दुमका के डीडीसी के पद पर रह चुके हैं. वह 2005 से 2008 तक दिल्ली में झारखंड के स्थानिक आयुक्त के पद पर भी कार्यरत थे. इस दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्रालय व झारखंड के विभागों के बीच समन्वय का काम किया.

अनुभव

राजीव गौबा के पास नीति निर्धारण और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का व्यापक अनुभव रहा है. वह केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में काम कर चुके हैं. गृह, रक्षा और वित्त मंत्रलय में भी काम कर चुके हैं. गौबा आंतरिक सुरक्षा मामलों में नक्सलवाद और जम्मू- कश्मीर के मुद्दों की जिम्मेवारी निभा चुके हैं. नक्सलवाद पर नियंत्रण के लिए नयी पॉलिसी और एक्शन प्लान बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. पुलिस आधुनिकीकरण और पुलिस सुधार के प्रभारी भी रह चुके हैं. इसके बाद वह सभी केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रभारी भी रह चुके हैं.

राजीव गौबा नैटग्रिड के सीइओ के रूप में भी काम कर चुके हैं. संचार एवं सूचना तकनीक विभाग में इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी के एडिशनल सचिव के पद पर भी रह चुके हैं. नेशनल इ-गवर्नेस प्लान के हेड रह चुके हैं. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम आरंभ करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

राजीव गौबा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर भी काम कर चुके हैं. नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के गठन में भी उनकी अहम भूमिका रही है. आइएमएफ के कार्यकारी निदेशक के वह वरीय सलाहकार के पद पर भी काम कर चुके हैं. रक्षा मंत्री के प्राइवेट सेक्रेटरी के पद पर भी काम कर चुके हैं. भारतीय उच्च रक्षा प्रबंधन पर सुब्रमण्यम कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का भी काम किया है. 1999 कारगिल वार के दौरान इन्हें मिलिट्री के मामले भी समझने का अवसर मिला. राजीव गौबा बिहार के गया, नालंदा और मुजफ्फरपुर में डीएम के पद पर भी रह चुके हैं. वहीं झारखंड के संताल-परगना के जनजातीय इलाकों में काम करने का भी इन्हें अनुभव रहा है.

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