संग्रहालय में आकर ही हम अपनी सांस्कृतिक विविधताओं को समझते

Updated at : 23 Dec 2024 11:23 PM (IST)
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संग्रहालय में आकर ही हम अपनी सांस्कृतिक विविधताओं को समझते

<P><H2>संस्कृति एवं परंपरा संबंधी ज्ञान को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करता संग्रहालय-डॉ भास्कर</P></H2><P><H2></P></H2><P><H2>चंद्रधारी संग्रहालय में शिक्षा का केंद्र संग्रहालय विषय पर संगोष्ठी</H2>दरभंगा.चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में संग्रहालयाध्यक्ष डॉ शंकर

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संस्कृति एवं परंपरा संबंधी ज्ञान को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करता संग्रहालय-डॉ भास्कर

चंद्रधारी संग्रहालय में शिक्षा का केंद्र संग्रहालय विषय पर संगोष्ठी

दरभंगा.चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में संग्रहालयाध्यक्ष डॉ शंकर सुमन की अध्यक्षता में ””””””””शिक्षा का केंद्र संग्रहालय”””””””” विषय पर संगोष्ठी हुई. मुख्य अतिथि डॉ भास्कर नाथ ठाकुर ने कहा कि संग्रहालय में आने के बाद ही लोग, संस्कृति एवं परंपरा संबंधी अपनी मूल अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं. इसी संस्कृति एवं परंपरा संबंधी ज्ञान को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिये संग्रहालय का निर्माण किया जाता है. कहा कि संग्रहालय में आकर ही हम अपनी सांस्कृतिक विविधताओं को समझते हैं.

संग्रहालय दृश्य शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र- डॉ उदय

लनामिवि के प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ उदय नारायण तिवारी ने कहा कि मनुष्य तार्किक प्राणी है. जब वह संग्रहालय जाता है तो तार्किकता सिद्ध होती है. संग्रहालय दृश्य शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है. यहां लोग मनोरंजक रूप से अध्ययन कर सकते हैं.

प्राचीन काल के विविधताओं का अध्ययन केंद्र होता संग्रहालय- डॉ अखिलेश

डॉ अखिलेश कुमार विभू ने कहा कि संग्रहालय न केवल शिक्षा, बल्कि भविष्य एवं सांस्कृतिक संरक्षण का केंद्र भी है. महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा में हाथी दांत की कला वस्तुओं का दुर्लभ भंडार है. इसके बारे में वहां जाकर अध्ययन किया जा सकता है. कहा कि संग्रहालय प्राचीन काल के विविधताओं का अध्ययन केंद्र होता है.

समृद्ध अतीत के बारे में जानकारी देता संग्रहालय- डॉ शंकर

इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश संग्रहालयाध्यक्ष डॉ शंकर सुमन ने किया. उन्होंने संग्रहालय का क्रमिक इतिहास एवं मानव जीवन में इसकी उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि 1784 ई. में सर विलियम जॉन्स द्वारा एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना की गई, जो संग्रहालय आंदोलन की शुरुआत थी. कहा कि संग्रहालय में संजोए गए धरोहर हमें अपने समृद्ध अतीत के बारे में जानकारी देता है.

तीर्थाटन का आधुनिक स्वरूप है पर्यटन- मुरारी

पुरातत्त्व विषय के शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने संचालन करते हुये कहा कि संग्रहालय आने से हम सीधे तौर पर अपने प्राचीन एवं पूर्वकालिक सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, कृषि, पशुपालन, पर्व त्यौहार, खानपान, प्रकृति आदि विषयों के बारे में जानते हैं. संग्रहालय निर्माण के पूर्व हमारे देश में दृश्य शिक्षा के रूप में तीर्थाटन था. इसी का आधुनिक स्वरूप पर्यटन है. मौके पर रंजीत कुमार, पूर्णिमा कुमारी, गिरिंद्र मोहन ठाकुर, गौतम प्रकाश, पुष्पांजलि कुमारी, कुमारी पलक, श्रवण कुमार, रिया कुमारी, सहाना खातून, अभिषेक आनंद आदि शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने आलेख प्रस्तुत किये.

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