अहंकार शून्य जीव को ही होती है ब्रह्म की प्राप्ति: हेमंत

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अहंकार शून्य जीव को ही होती है ब्रह्म की प्राप्ति: हेमंत

गोरखपुर के चौरा चौरी से पधारे मानस मर्मज्ञ पंडित हेमंत तिवारी ने श्रीरामचरित मानस के धनुष यज्ञ प्रसंग की चर्चा बड़े ही मार्मिक ढंग से की.

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मेदिनीनगर. गोरखपुर के चौरा चौरी से पधारे मानस मर्मज्ञ पंडित हेमंत तिवारी ने श्रीरामचरित मानस के धनुष यज्ञ प्रसंग की चर्चा बड़े ही मार्मिक ढंग से की. उन्होंने बुधवार की शाम सुदना के तुलसी मानस मंदिर परिसर में आयोजित श्रीरामचरित मानस नवाह परायण महायज्ञ के दौरान भगवान की कथा का रसपान कराया. उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अहंकार रूपी धनुष का खंडन कर भक्तों का कल्याण किया. अहंकार जीव का परम शत्रु है. जिस जीव का मन, बुद्धि, चित्त निर्मल और अहंकार शून्य है वह परमात्मा को प्राप्त करने का अधिकारी है. मानस के इस संदेशों को आत्मसात कर परमात्मा प्राप्ति के लिए सार्थक प्रयास करना चाहिए. इधर मां शारदा शक्ति पीठ मैहर से पधारी महामंडलेश्वर साध्वी अन्नपूर्णा जी ने मनू व सतरूपा की तपस्या प्रसंग का दार्शनिक विवेचन किया. उन्होंने कहा कि परमात्मा के दर्शन व सेवा का अवसर पाने के लिए मनु व सतरूपा ने घोर तप किया था. उन्होंने कहा कि जब तक मानव के हृदय में अनुराग नहीं होगा,तब तक परमात्मा मिलने वाले नहीं हैं.जीवन के कल्याण के लिए प्रभु के प्रति अटूट विश्वास व अगाध प्रेम होना चाहिए. उन्होंने युवाओं को अपने माता पिता व बुजुर्गों का आदर, सम्मान और सेवा पर विशेष जोर दिया.

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Vikash Nath

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