गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ने के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहा लाभ

Edited by VIKASH KUMAR
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फोटो100.किसान गौतम सिंह फोटो101.किसान सोनू कुमार किसानों ने औने-पौने दाम पर बेचने पर बढ़ाया लक्ष्य, बिचौलियों ने उठाया फायदा = गेहूं अधिप्राप्ति लक्ष्य को ले सांसद सहित किसान संगठनों

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फोटो100.किसान गौतम सिंह फोटो101.किसान सोनू कुमार किसानों ने औने-पौने दाम पर बेचने पर बढ़ाया लक्ष्य, बिचौलियों ने उठाया फायदा = गेहूं अधिप्राप्ति लक्ष्य को ले सांसद सहित किसान संगठनों ने भी जतायी थी आपत्ति बाजार भाव बढ़ने से अब पैक्सों के बजाय सीधे खुले बाजार में गेहूं बेच रहे किसान भभुआ. जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाये जाने के बाद भी अब किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है. जब अधिकांश किसानों ने औने-पौने दाम पर अपना गेहूं बेच दिया, तब सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीद का लक्ष्य बढ़ाया. गौरतलब है कि शुरुआती चरण में जब फसल कटकर बाजार में जाने की स्थिति में आयी, तो सरकार द्वारा कैमूर जिले को मात्र 507 एमटी गेहूं खरीद का ही लक्ष्य दिया गया था. इसे लेकर बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की थी. साथ ही किसान संगठनों व कैमूर किसान यूनियन ने भी मुख्यमंत्री, सहकारिता मंत्री व जिलाधिकारी को ई-मेल भेजकर लक्ष्य बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन जब तक निर्णय लिया गया, तब तक लाचार किसान अपनी उपज निकाल चुके थे. समर्थन मूल्य से कम दर पर बेची फसल शुरुआती लक्ष्य इतना कम था कि जिले की 151 पैक्स व व्यापार मंडल समितियों को मात्र 39 क्विंटल गेहूं खरीदने का कोटा मिला था. आर्थिक तंगी के कारण किसानों ने अपना गेहूं 2200 रुपये से लेकर 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से साहूकारों व बिचौलियों को बेच दिया, जबकि सरकारी समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित था. कम लक्ष्य होने के कारण किसानों को इस मूल्य का लाभ नहीं मिल सका. अब बाजार भाव चढ़ने से पैक्सों से बढ़ी दूरी अब जबकि लक्ष्य बढ़ा दिया गया है, तो बाजार भाव का असर सरकारी खरीद पर पड़ गया है. वर्तमान में बाजार में गेहूं का भाव 2450 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक पहुंच गया है. ऐसे में किसान पैक्सों के चक्कर लगाने व भुगतान की प्रतीक्षा करने के बजाय सीधे बाजार में नगद पैसे लेकर गेहूं बेचना बेहतर समझ रहे हैं. सरकार की इस देरी का खामियाजा अंततः जिले के मेहनतकश किसानों को ही भुगतना पड़ा है. क्या कहते हैं पदाधिकारी इस संबंध में जब जिला सहकारिता पदाधकिारी सह गेहूं क्रय नोड़ल पदाधिकारी शशिकांत शशि से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि बढ़े लक्ष्य 4880 एमटी के आलोक में 31 प्रतिशत गेहूं की खरीद हुई है. अब बाजार भाव बढ़ने से गेहूं अधिप्राप्ति की रफ्तार पहले से कम हो गयी है. क्या कहते हैं किसान –सीवों गांव के किसान गौतम सिंह का कहना है कि सरकार जब किसान बर्बाद हो जाते हैं तब नींद से जागती है. किसानों की पूंजी उनकी फसल ही है. जरूरत के कई काम फसल के बाजार में बेचे जाने तक लटके रहते हैं. वही इस साल भी हुआ. जब गेहूं के खरीद के लिए पैक्स का दरवाजा खटखटाया गया तो पता चला कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद का लक्ष्य बहुत कम है. इससे पैक्स गेहूं नहीं खरीद रहे हैं. लाचार हो कर बाजार में गेहूं 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल घाटे पर बेचना पड़ा है. –दरौली गांव के किसान सोनू कुमार ने बताया कि पैक्स वाले गेहूं खरीदने से इंकार कर रहे थे. उनका कहना था कि लक्ष्य इतना कम है कि एक किसान का भी पूरा गेहूं नहीं खरीदा जा सकता है. सोनू कुमार ने बताया कि जब उनका गल्ला बाजार में बिक गया तो पता चला कि गेहूं का लक्ष्य बढ़ा दिया गया और पैक्स गेहूं खरीद रहे हैं. लेकिन, अब मेरे पास गेहूं बचा ही नहीं था कि मैं पैक्स को अपना गेहूं बेच सकूं. आर्थिक तंगी के कारण मुझे शुरूआत में ही अपना गल्ला बाजार में 2200 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पडा.

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