मन और विचारों में शुद्धता लाना ही उत्तम शौच धर्म

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मन और विचारों में शुद्धता लाना ही उत्तम शौच धर्म

पर्यूषण पर्व के चौथे दिन श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, धर्म चर्चा और महाआरती हुई

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हजारीबाग. पर्यूषण पर्व के चौथे दिन रविवार को उत्तम शौच धर्म मनाया गया. संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के संघ की ब्रह्मचारिणी बहन संपदा दीदी ने बताया कि उत्तम शौच धर्म का अर्थ बाहरी शुद्धता से कहीं बढ़कर आंतरिक शुद्धता और पवित्रता है. यह धर्म मन में, विचारों में और शुद्धता लाने की बात करता है. अपनी जरूरत और इच्छाओं के बीच के अंतर को समझें. पर्व को लेकर सुबह दोनों मंदिरों में श्रावकों की चहल-पहल लगी रही. बच्चों का उत्साह देखने लायक था. प्रातः श्रीजी का अभिषेक शांति धारा, धर्म चर्चा के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई. पूजन विधान में बैठने वाली 24 सौभाग्यवती महिलाओं के पतियों ने विश्व, राष्ट्र, समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण के लिए शांति धारा की. संध्या में महाआरती के साथ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण समाज के वरिष्ठ श्रावकों ने किया.

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