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बिहार-झारखंड की 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी

Updated at : 08 Mar 2019 11:21 AM (IST)
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बिहार-झारखंड की 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी

पटना : बिहार-झारखंड की 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. इतना ही नहीं, महिलाओं की बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) भी कम है. बिहार में 30.4 प्रतिशत महिलाओं का बीएमआइ सामान्य से कम है. झारखंड में यही आंकड़ा 31.5 प्रतिशत है. […]

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पटना : बिहार-झारखंड की 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. इतना ही नहीं, महिलाओं की बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) भी कम है. बिहार में 30.4 प्रतिशत महिलाओं का बीएमआइ सामान्य से कम है. झारखंड में यही आंकड़ा 31.5 प्रतिशत है. बिहार की 49 वर्ष तक की 58.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनेमिक मिली हैं. झारखंड में यही आंकड़ा 62.6 प्रतिशत है.

पूरे देश में 50.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनेमिक हैं. सामान्य महिलाओं की भी स्थिति अच्छी नहीं है. 15-49 वर्ष की सामान्य महिलाओं की सेहत भी कुछ ठीक नहीं है. बिहार में 60.4, झारखंड में 65.3 और पूरे देश में 53.1 प्रतिशत महिलाएं एनेमिक हैं. शिक्षा विभाग, आइसीडीएस निदेशालय की ओर से स्कूलों में किशारियों को आयरन की गालियां मुहैया करायी जा रही हैं. स्कूल नहीं जाने वाली बिहार की करीब 38 हजार किशोरियों को आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषण संबंधी खाद्य पदार्थ दिया जाता है. साथ ही, इन्हें भी आयरन की गोली उपलब्ध करायी जाती है. इन किशोरियों को स्कूल भेजने का भी प्रयास किया जाता है, ताकि शिक्षा की मुख्य धारा से ये जुड़ सकें.

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में भी खुलासा

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में भी महिलाओं की सेहत ठीक नहीं होने का खुलासा हो चुका है. राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से हर माह की नौ तारीख को गर्भवतियों के लिए सरकारी अस्पतालों में विशेष कैंप का आयोजन किया जाता है. प्रदेश के 588 स्वास्थ्य संस्थानों (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल) में इस अभियान के तहत सेहत जांची जाती है. 16 माह में सात लाख महिलाओं की जांच हुई थी. इनमें से 15532 महिलाएं किसी न किसी जानलेवा बीमारी की चपेट में थीं. 24765 महिलाओं में जटिल गर्भावस्था का पता चला था. 339 सिफलिस से पीड़ित, 310 में एचआइवी पॉजिटिव, 1283 में डायबिटीज, 6800 में सीवियर एनीमिया, 24765 में जटिल गर्भावस्था और 6800 महिलाएं हाइपरटेंशन की चपेट में पायी गयी थीं.

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