Elections Results : तमिलनाडु में नहीं चला‘मोदी मैजिक’, केरल में दो सीटों पर आगे, तेलंगाना में कांटे की टक्कर
एग्जिट पोल में यह दावा किया गया था कि तमिलनाडु में इस बार बीजेपी का खाता खुलेगा, लेकिन अबतक जो आंकड़े सामने आए हैं, वो कुछ और ही दृश्य बयां कर रहे हैं.
Elections Results : लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आने लगे हैं. रुझानों में अबतक जो स्थिति नजर आ रही है उसमें बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियां बहुमत के आंकड़ें को प्राप्त कर चुकी है, लेकिन ये रुझान हैं, नतीजे इससे अलग भी हो सकते हैं. अभी जो स्थिति नजर आ रही है उसमें इंडिया गठबंधन भी अभी रेस में शामिल है और उसके आंकड़े 230-232 के करीब हैं. बात अगर दक्षिण भारत के आंकड़ों की करें तो यहां भी एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है. एग्जिट पोल में जो आंकड़े सामने आए थे, उनमें यह कहा गया था कि दक्षिण भारत में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन अभी तक जो आंकड़े सामने आए हैं, उसमें इस तरह की बात सामने नजर नहीं आई है.
केरल में खुला बीजेपी का खाता
केरल में बीजेपी को दो सीटों पर बढ़त है, जबकि कांग्रेस 13 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं आंध्र प्रदेश में बीजेपी तीन सीटों पर आगे चल रही है, जबकि टीडीपी 16 सीटों पर आगे है. कर्नाटक में बीजेपी को अच्छी बढ़त हासिल है और बीजेपी 17 सीटों पर आगे चल रही है जबकि कांग्रेस आठ सीटों पर आगे है और जेडीएस 3 सीटों पर आगे चल रही है. तमिलनाडु में डीएमके 21और कांग्रेस आठ सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी को अबतक एक भी सीट पर बढ़त हासिल नहीं हुई है. वहीं तेलंगाना में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है और दोनों ही पार्टियां आठ-आठ सीटों पर आगे चल रही हैं.
तमिलनाडु में नहीं मिली एक भी सीट पर बढ़त
बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में पांच दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और लक्षद्वीप और पुडुचेरी के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी ताकत झोंकी थी. दक्षिण भारत के इन राज्यों की 131 सीटों में से वह अधिक से अधिक सीट जीतना चाहती थी, लेकिन अभी जो स्थिति है, उसमें यह संभव प्रतीत नहीं हो रहा है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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