Shashi Tharoor Thiruvananthapuram Seat Result 2024: शशि थरूर ने चौथी बार दर्ज की जीत, 16077 वोट से राजीव चंद्रशेखर को हराया

Edited by Rajneesh Anand
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कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से 2009 से सांसद हैं. उन्होंने जीत की तिकड़ी लगाई है.

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Shashi Tharoor Thiruvananthapuram Seat Result 2024: तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी शशि थरूर चुनाव जीत गए हैं, उन्होंने बीजेपी के नेता राजीव चंद्रशेखर को 16077 वोट के अंतर से हराया. शशि थरूर को 358155 वोट मिले. उनके खिलाफ चुनावी मैदान में बीजेपी के राजीव चंद्रशेखर और सीपीआई के पन्नियन रविंद्रन थे.

शशि थरूर लगा चुके हैं जीत की तिकड़ी


Shashi Tharoor Thiruvananthapuram Seat Result 2024: तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस के चर्चित नेता शशि थरूर सांसद हैं. शशि थरूर यहां पिछले तीन लोकसभा चुनाव से सांसद हैं. वे जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं और अगर इस बार फिर वे चुनाव जीतते हैं तो यह उनकी चौथी जीत होगी. उससे पहले इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी के पीके वासुदेवन नायर और पन्न्यन रवींद्रन सांसद रह चुके हैं. इतिहास पर नजर डालें तो इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा नजर आता है. आजादी के बाद जब 1952 में लोकसभा चुनाव हुए तो निर्दलीय एनी मास्कारेन ने चुनाव जीता, उनके बाद 1957 में ईश्वर अय्यर और 1962 में पीएस नटराज पिल्लई चुनाव जीते ये भी निर्दलीय सांसद थे. उनके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से पी विश्वम्भरन ने चुनाव जीता. 1977 के बाद से इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवारों का कब्जा हो गया और तीन बार से कांग्रेस के सांसद यहां से चुनाव जीत रहे हैं.

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

शशि थरूर कांग्रेस के दिग्गज राजनेता हैं. उनका जन्म लंदन में हुआ है,लेकिन वे पले-बढ़े भारत में हैं. उन्होंने दिल्ली के संत स्टीफन काॅलेज से बीए की पढ़ाई की है. शशि थरूर एक मलयाली परिवार से हैं, जहां उनकी दो छोटी बहनें हैं. शशि थरूर की अंग्रेजी पर पकड़ बहुत अच्छी है और उन्होंने अबतक लगभग 19 किताबें लिखीं हैं. 2019 में उन्हें अंग्रेजी में लेखन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था. यह किताब एन एरा ऑफ डार्कनेस ब्रिटिश काल पर लिखी गई है. शशि थरूर को युवाओं के बीच काफी पसंद किया जाता है. शशि थरूर ने 1981 में तिलोत्तमा मुखर्जी से शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं. बाद में इनका तलाक हो गया और शशि थरूर ने सुनंदा पुष्कर से दूसरी शादी की थी, लेकिन सुनंदा पुष्कर की मौत रहस्यमयी तरीके से हो गई थी.


क्या है जातीय समीकारण

2011 की जनगणना की अनुसार तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी 3,301,427 है. यहां की आबादी का 27.83% हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है और 72.17% प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. हिंदू यहां बहुसंख्यक है जिनकी कुल जनसंख्या 66.46 प्रतिशत है. मुसलमान 13.72 प्रतिशत और ईसाई 19.10 प्रतिशत हैं. 2024 के चुनावों के लिए जारी मतदाता सूची के अनुसार इस संसदीय कुल मतदाता 14,03,281 हैं, जिनमें 7,27,469 महिलाएं, 6,75,771 पुरुष हैं, 41 ट्रांसजेंडर मतदाता भी यहां हैं. चूंकि शहरी आबादी यहां ज्यादा है इसलिए शहरी मतदाता 74 प्रतिशत और 26% ग्रामीण मतदाता हैं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कुल मतदाताओं की संख्या क्रमशः 9.82% और 0.45% है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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