Success Story: टमाटर से चमड़ा बना रही यह स्टार्टअप कंपनी, बाजार में बेचे जा रहे जैकेट, बैग और जूते

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Tomato Bio-Leather

Success Story: भारत में एक स्टार्टअप ‘द बायो कंपनी’ (TBC) टमाटर के कचरे से बायो-लेदर बना रहा है, जिसका उपयोग जैकेट, बैग और जूतों में किया जा रहा है. 26 वर्षीय प्रीतेश मिस्त्री ने इस इनोवेटिव और पर्यावरण-अनुकूल बिजनेस की शुरुआत की, जिससे टिकाऊ फैशन इंडस्ट्री में क्रांति आ रही है.

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Success Story: टमाटर वेज और नॉन-वेज के जायके में चार चांद लगा देता है, लेकिन क्या आपने कभी इस बात का गुमान किया है कि भारत का कोई बंदा सब्जी और सलाद में इस्तेमाल होने वाले टमाटर से लेदर भी बना सकता है और उस लेदर के जूते और बैग बाजार में बेचे जा रहे हों. निश्चित तौर पर आप इस बात पर यकीन नहीं करेंगे, लेकिन यह सौ फीसदी सच है. जी हां! भारत में एक स्टार्टअप टमाटर से बायो-लेदर (Bio-Leather) बना रहा है, जिसका इस्तेमाल जैकेट, बैग और जूते जैसे फैशनेबल प्रोडक्ट्स में हो रहा है. यह इनोवेटिव तरीका जानवरों को नुकसान पहुंचाए बिना एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करता है. आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

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ऐसे बनता है टमाटर से लेदर

हिंदी की वेबसाइट नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 4.40 अरब टन टमाटर का उत्पादन होता है. इसमें से 30-35% बर्बाद हो जाता है. इसी टमाटर के कचरे से ‘द बायो कंपनी’ (The Bio Company-TBC) बायो-लेदर तैयार कर रही है. इस प्रक्रिया में पॉलीयुरेथेन (PU) और पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे यह पारंपरिक नकली चमड़े से अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होता है. टमाटर में मौजूद पेक्टिन और अन्य प्राकृतिक तत्व इसे मजबूत बनाते हैं, जिससे यह असली चमड़े जैसा महसूस होता है. इस तकनीक के कारण यह पीयू/पीवीसी फ्री है, जो इसे बाजार में उपलब्ध अन्य सिंथेटिक लेदर से अलग करता है.

कौन है इस अनोखे स्टार्टअप के पीछे?

इस स्टार्टअप की स्थापना 26 वर्षीय प्रीतेश मिस्त्री ने की थी. उन्होंने इसे ‘द बायो कंपनी’ (TBC) के नाम से शुरुआत की, जो टमाटर के कचरे से टिकाऊ बायो-लेदर बना रही है. 2021 में इस कंपनी को PETA वेगन फैशन अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट इनोवेशन’ का पुरस्कार मिला था.

बाजार में बढ़ती डिमांड और कमाई

बायो-लेदर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा फैशन, एक्सेसरीज़ और ऑटोमोटिव सेक्टर में हो रहा है. कई इंटरनेशनल ब्रांड इस लेदर से जैकेट, बैग और जूते बना रहे हैं. टोरंटो स्थित प्लांट-बेस्ड हैंडबैग ब्रांड ‘सतुहाटी’ की फाउंडर नताशा मंगवानी का कहना है, “बायो-लेदर पीयू/पीवीसी फ्री है और इसका प्लांट-बेस्ड ओरिजिन इसे खास बनाता है.”

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टीबीसी हर महीने बन रहा 5,000 मीटर बायो-लेदर

फिलहाल, टीबीसी हर महीने करीब 5,000 मीटर बायो-लेदर का उत्पादन कर रही है. हालांकि, कंपनी की सालाना कमाई और टर्नओवर को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. लेकिन, जिस तरह से टिकाऊ फैशन का ट्रेंड बढ़ रहा है, आने वाले वर्षों में बायो-लेदर का मार्केट तेजी से आगे बढ़ेगा.

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