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रूस में मंदी की दस्तक, विदेशी निवेश की कमी और सैन्य निर्भरता से बढ़ा आर्थिक संकट

Updated at : 19 Jun 2025 9:24 PM (IST)
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Russia Recession

रूस के अर्थव्यवस्था मामलों के मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव.

Russia Recession: रूस के आर्थिक मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में देश की अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर बढ़ता बताया. यूक्रेन युद्ध के चलते हुए भारी सैन्य खर्च ने अब तक अर्थव्यवस्था को संभाले रखा, लेकिन विदेशी निवेश में गिरावट और मुद्रास्फीति ने संकट को गहरा कर दिया है. विशेषज्ञों ने गैर-सैन्य क्षेत्रों में निवेश की कमी पर चिंता जताई है. अब रूस की आर्थिक दिशा सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगी कि वह मंदी टाल सके या नहीं.

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Russia Recession: रूस के आर्थिक मामलों के मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि उपलब्ध आंकड़े भले ही तत्काल मंदी की पुष्टि न करते हों, लेकिन वर्तमान संकेतकों और कंपनियों की धारणा को देखते हुए स्पष्ट है कि रूस अब आर्थिक संकुचन के किनारे पर खड़ा है.

युद्धकालीन रक्षा खर्च ने दिखाई थी मजबूती

यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था ने अब तक उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. रक्षा बजट में भारी वृद्धि और युद्ध से जुड़े खर्चों के कारण आर्थिक वृद्धि बनी रही. इस दौरान बेरोजगारी दर भी कम बनी रही और मुद्रास्फीति के अनुरूप मजदूरी में बढ़ोतरी हुई. इसके अतिरिक्त, सैन्य सेवा में भर्ती के लिए दिए गए बोनस, और युद्ध में मारे गए सैनिकों के परिवारों को मिली आर्थिक सहायता ने भी ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आय बढ़ाने में मदद की.

सैन्य खर्चों पर टिकी अर्थव्यवस्था

विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध आधारित आर्थिक मजबूती अस्थायी है. विदेशी निवेश में भारी गिरावट और गैर-सैन्य क्षेत्रों में निवेश की कमी के कारण अर्थव्यवस्था का संतुलन डगमगा रहा है. लंबी अवधि में लगातार उच्च मुद्रास्फीति और सीमित आर्थिक विविधीकरण देश की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं.

अर्थशास्त्रियों ने दी चेतावनी

देश और विदेश के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैर-सैन्य क्षेत्रों में निवेश नहीं बढ़ाया गया, तो अर्थव्यवस्था स्थायी मंदी में जा सकती है. सरकार की नीति अब इस मोड़ पर है, जहां उसे तय करना होगा कि वह रक्षा के बजट से हटकर सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाएगी या नहीं.

बाकी अधिकारियों का मिला-जुला आकलन

हालांकि, रेशेतनिकोव ने मंदी की ओर इशारा किया, लेकिन रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव और केंद्रीय बैंक की गवर्नर एल्विरा नबीउलीना ने कुछ हद तक आशावादी रुख अपनाया. सिलुआनोव ने कहा कि अर्थव्यवस्था में भले ही “सुस्ती” आई हो, लेकिन किसी भी मंदी के बाद पुनरुद्धार की संभावना बनी रहती है. वहीं, नबीउलीना ने कहा कि अर्थव्यवस्था सिर्फ “अत्यधिक तेजी” के दौर से निकल रही है और फिलहाल स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई जा रही है.

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नाजुक दौर से गुजर रही रूसी अर्थव्यवस्था

रूस की अर्थव्यवस्था इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रही है, जहां राजनीतिक फैसले, वैश्विक संबंध, और आंतरिक निवेश नीति यह तय करेंगे कि देश स्थायी मंदी की ओर जाएगा या खुद को फिर से संतुलन में ला पाएगा. विदेशी निवेश की कमी, मुद्रास्फीति और अत्यधिक सैन्य निर्भरता देश के सामने आने वाली सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियां बनती जा रही हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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