देश में शुद्ध FDI बढ़कर 7.7 अरब डॉलर पर पहुंचा, चालू खाता घाटे की भरपाई के लिए अब भी कम
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 29 May 2026 6:24 PM
RBI Annual Report 2026 (Photo: ANI)
RBI Annual Report : भारत में शुद्ध एफडीआई (Net FDI) उछलकर $7.7 अरब पर पहुंचा, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मुनाफे की निकासी से विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ा दबाव. जानिए आरबीआई (RBI) की रिपोर्ट का पूरा गणित.
RBI Annual Report : देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को लेकर एक बड़ी और मिली-जुली खबर सामने आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार (29 मई, 2026) को जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI) में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
हालांकि, राहत की इस खबर के साथ ही केंद्रीय बैंक ने सचेत किया है कि कुल पूंजी का यह प्रवाह देश के चालू खाता घाटे (CAD – Current Account Deficit) की पूरी तरह भरपाई करने के लिए नाकाफी (अपर्याप्त) रहा है, जिसके कारण देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा है.
पिछले साल के मुकाबले भारी उछाल
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विदेशी निवेश के मोर्चे पर महत्वपूर्ण सुधार हुआ है.
- शुद्ध एफडीआई (Net FDI): वित्त वर्ष 2025-26 में नेट एफडीआई प्रवाह 7.7 अरब डॉलर रहा. यह वित्त वर्ष 2024-25 के मात्र 1 अरब डॉलर के मुकाबले बहुत बड़ी छलांग है. (हालांकि, यह 2023-24 के 10.2 अरब डॉलर और 2022-23 के 28 अरब डॉलर से अभी भी कम है).
- सकल एफडीआई (Gross FDI): पिछले वित्त वर्ष में सकल विदेशी निवेश प्रवाह बढ़कर 94.5 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पिछले साल 80.6 अरब डॉलर था.
- दुनिया में भारत का डंका: ‘एफडीआई मार्केट्स’ के आंकड़ों के मुताबिक, नई एफडीआई घोषणाओं (New FDI Announcements) के मामले में भारत दुनिया भर में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर रहा है, जो भारतीय बाजार पर वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दिखाता है.
मुनाफा बाहर ले गए विदेशी निवेशक
सकल एफडीआई में भारी बढ़ोतरी के बावजूद ‘नेट एफडीआई’ का आंकड़ा 7.7 अरब डॉलर पर सिमटने के पीछे दो मुख्य कारण रहे.
- मुनाफावसूली और निकासी: विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से अपना मुनाफा देश से बाहर ले जाने और निवेश की गई राशि को निकालने (Outflow) की मात्रा बढ़कर 53.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई.
- भारतीय कंपनियों का विदेश में निवेश: इस दौरान भारतीय कंपनियों ने भी विदेशों में 33.3 अरब डॉलर का बड़ा निवेश किया.
किन सेक्टर्स और देशों से आया सबसे ज्यादा पैसा?
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| शीर्ष सेक्टर्स (Sectors) | विदेशी निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र (Service Sector) में आया, जिसके बाद विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) दूसरे स्थान पर रहा. |
| प्रमुख देश (Countries) | भारत में आने वाले कुल एफडीआई का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सिंगापुर, अमेरिका, मॉरीशस, जापान, नीदरलैंड और यूएई (UAE) से आया. |
विदेशी मुद्रा भंडार और FPI पर पड़ा वैश्विक तनाव का असर
आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में वैश्विक निवेश का माहौल काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसका सीधा असर देश के आर्थिक संतुलन पर दिखा.
- विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट: अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान शुद्ध पूंजी प्रवाह घटने और चालू खाता घाटे की भरपाई न हो पाने के कारण, भुगतान संतुलन (BoP) के आधार पर देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई.
- शेयर बाजार से भारी निकासी (FPI Outflow): विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का रुख पूरे साल बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा. पूरे वर्ष में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 16.5 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी (बिकवाली) की, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा इक्विटी (शेयर बाजार) का था.
- मार्च 2026 में बड़ा झटका: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अचानक शुरू हुए भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण अकेले मार्च 2026 के महीने में ही निवेशकों ने 13.1 अरब डॉलर बाजार से निकाल लिए.
- बॉन्ड मार्केट रहा सुरक्षित: इस अनिश्चितता के बीच अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले भारतीय डेट/बॉन्ड खंड (Bond Segment) में 2.1 अरब डॉलर का मामूली निवेश आया.
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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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