भारत के पहले बजट से लेकर साल 2026 तक, 166 साल में कितनी बदल गई तस्वीर, देखें आंकड़ा

Updated at : 01 Feb 2026 7:33 PM (IST)
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India First Budget

166 साल में कितनी बदल गई बजट की तस्वीर

India First Budget: रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया. यह भारत का 53.5 लाख करोड़ रुपये का बजट है. 1860 ईस्वी के चमड़े के थैले से लेकर आज के पेपरलेस बजट तक, बजट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. 166 साल की इस लंबी यात्रा में बजट अब सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, प्रशासन और तकनीक में आए बदलावों का आईना बन गया है.

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India First Budget: भारत आज लाखों करोड़ों रुपये का विशाल बजट पेश कर रहा है. दुनिया में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में इंडियन इकोनॉमी शुमार है. ऐसे में हमें ऐतिहासिक दिन को याद करना जरूरी है, जब भारतीय इतिहास में पहली बार बजट शब्द सुनाई दिया था. यह दिन था 7 अप्रैल 1860. दरअसल 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश शासन में दो बदलाव आए. पहला ईस्ट इंडिया कंपनी निजी हाथों से निकलकर ब्रिटिश क्राउन के अधीन हो गई. दूसरा, ब्रिटिश क्राउन के अधीन होने पर यहां के खर्चों का लेखा जोखा शुरू किया गया.

1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका था. वित्तीय संकट को संभालने के लिए जेम्स विल्सन को भारत भेजा गया, उन्होंने पहली बार भारत का पहला बजट पेश किया. वित्त सदस्य जेम्स विल्सन ने यह बजट चमड़े के एक थैले में रखकर संसद में पेश किया था. उस दौर में बजट का मकसद औपनिवेशिक शासन जिसमें खासकर सैनिकों के खर्चों को पूरा करना और राजस्व जुटाना था. आम जनता की भलाई की बजाय बजट के जरिए टैक्स वसूली और प्रशासनिक नियंत्रण पर अधिक जोर दिया गया था.

200 रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर टैक्स

जेम्स विल्सन के पेश किए अपने पहले बजट में पहली बार भारतीय लोगों पर इनकम टैक्स लगाया गया था. जिन लोगों की सालाना इनकम 200 से कम थी उन्हें कोई टैक्स नहीं देना था. लेकिन इनकम 200 से 500 रुपये के बीच है तो उन्हें 2% और 500 से ऊपर है तो 4% टैक्स देना होगा. वहीं निर्मला सीतारमण के पेश किए गए मौजूदा बजट में 3 लाख रुपये तक सालाना आमदनी पर टैक्स शून्य रखा गया है. 3 लाख से लेकर 50 लाख से अधिक इनकम पर अलग-अलग टैक्स स्लैब रखे गए हैं.

अवधि / बजटसालाना आयटैक्स दर
पहला भारतीय बजट (जेम्स विल्सन, 1860)₹200 से कमकोई टैक्स नहीं
₹200 – ₹5002%
₹500 से अधिक4%
मौजूदा बजट (निर्मला सीतारमण, 2026–27)₹3 लाख तककोई टैक्स नहीं
₹3 लाख से अधिकअलग-अलग स्लैब (आय के अनुसार)
₹50 लाख से अधिकउच्चतम टैक्स स्लैब लागू

रक्षा बजट को कम किया गया था

ब्रिटिश सरकार के कार्यकाल में पेश किए गए देश के पहले बजट में ब्रिटिश सरकार के खर्च को कम करने के लिए सेना के बजट में बड़ी कटौती का प्रस्ताव रखा गया था. इसका मकसद सरकारी खजाने को फिर से मजबूत करना था. वहीं मौजूदा बजट में वित्त मंत्री ने रक्षा बजट में भारी भरकम इजाफा किया है. भारत ने बजट 2026–27 में अपने रक्षा खर्च को बढ़ाते हुए इसमें 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से ₹2.19 लाख करोड़ आधुनिकीकरण के लिए रखा गया है. यह पिछले साल की तुलना में लगभग 22% की वृद्धि है.

बिंदु1860 का बजट2026–27 का बजट
नीतिसेना के खर्च में कटौतीरक्षा बजट में बड़ा इजाफा
उद्देश्यब्रिटिश सरकार का खर्च कम करनासुरक्षा व सैन्य आधुनिकीकरण
कुल रक्षा बजटकटौती का प्रस्ताव₹7.85 लाख करोड़
आधुनिकीकरणउल्लेख नहीं₹2.19 लाख करोड़
वार्षिक वृद्धिलगभग 22%

कई अन्य कर भी लागू किए गए

जेम्स विल्सन ने अपने बजट में व्यापार से जुड़े कई नए कर भी लागू किए थे. उन्होंने लाइसेंस टैक्स और ड्यूटी का प्रस्ताव अपने बजट में रखा था. इसका मतलब है कि अगल किसी को कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो तो इसके लिए उसे लाइसेंस लेना होगा और उसके लिए शुल्क जमा करना होगा. 1960 में विदेशों से आने वाले सामानों पर टैक्स लगाया गया. 2026 के बजट में बेसिक कस्टम ड्यूटी 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया. 1960 में पहली बार नोट छापने की सरकारी व्यवस्था शुरू की हुई. 1960 में लाइसेंस टैक्स शुरू किया गया. 1960 के बजट में जेम्स विल्सन ने व्यापार से जुड़े कई नए कर लागू किए

विषय1860 (जेम्स विल्सन)2026 का बजट
व्यापार करनए व्यापार कर लागूटैक्स सिस्टम सरलीकरण
लाइसेंस टैक्सपहली बार लागूअधिकांश क्षेत्रों में समाप्त/सरल
कस्टम ड्यूटीविदेश से आने वाले सामान पर टैक्सबेसिक कस्टम ड्यूटी 20% → 10%
नोट छापने की व्यवस्थासरकारी व्यवस्था की शुरुआतपहले से स्थापित प्रणाली
उद्देश्यराजस्व बढ़ाना और नियंत्रणव्यापार को बढ़ावा देना
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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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