महाराष्ट्र सरकार का बड़ा तोहफा, अब रिटायरमेंट पर मिलेगी 50% पक्की पेंशन

Maharashtra NPS Revision (Photo: Freepik)
Maharashtra NPS Revision: महाराष्ट्र में NPS कर्मचारियों को अब आखिरी सैलरी की 50% पक्की पेंशन मिलेगी. फैमिली पेंशन और न्यूनतम ₹7,500 की गारंटी के साथ जानें नई योजना की पूरी डिटेल.
Maharashtra NPS Revision: महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. राज्य के वित्त विभाग ने एक नया सर्कुलर जारी कर साफ कर दिया है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारी अब एक ‘रिवाइज्ड’ यानी संशोधित पेंशन योजना का फायदा उठा सकते हैं. यह योजना काफी हद तक केंद्र की ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (UPS) जैसी है, जिसमें शेयर बाजार के भरोसे रहने के बजाय एक तय रकम की गारंटी दी गई है.
क्या है 50% पेंशन का नया गणित?
इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि अगर किसी कर्मचारी ने 20 साल या उससे ज्यादा नौकरी की है, तो रिटायरमेंट के समय उसकी जो आखिरी बेसिक सैलरी होगी, उसका सीधा 50% हिस्सा उसे पेंशन के रूप में मिलेगा. इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA) भी जोड़ा जाएगा. जिन लोगों की सर्विस 10 से 20 साल के बीच है, उन्हें उनकी नौकरी के सालों के हिसाब से आनुपातिक (Proportionate) पेंशन दी जाएगी. कम से कम 10 साल काम करने वालों को सरकार ने 7,500 रुपये महीना की न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी है. हालांकि, 10 साल से कम सर्विस वालों को इस पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा.
फैमिली पेंशन और पुराने पैसों का क्या होगा?
सरकार ने कर्मचारियों के परिवार का भी ख्याल रखा है. अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन, कर्मचारी की कुल पेंशन का 60% हिस्सा होगी. लेकिन यहां एक जरूरी शर्त है कि रिटायरमेंट के समय PFRDA से मिलने वाले कुल फंड का 60% हिस्सा कर्मचारी को सरकारी खजाने में जमा करना होगा. बाकी 40% हिस्सा एन्युइटी (Annuity) खरीदने में जाएगा, जिससे मिलने वाली रकम को सरकार पेंशन में एडजस्ट करेगी. साथ ही, अगर आपने पहले NPS से कोई पैसा निकाला है, तो उसे 10% ब्याज के साथ वापस करना होगा, वरना पेंशन की रकम काट ली जाएगी.
किसे मिलेगा फायदा और कब तक है मौका?
यह स्कीम उन सभी कर्मचारियों के लिए है जो जिला परिषद, पंचायत समिति, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान और कृषि विश्वविद्यालयों में काम कर रहे हैं. ध्यान रहे, यह स्कीम अनिवार्य नहीं है; यह एक ऑप्शन है. अगर कोई कर्मचारी इस नई व्यवस्था को चुनना चाहता है, तो उसे 31 दिसंबर 2026 तक अपनी सहमति देनी होगी. जो कर्मचारी इस्तीफा देंगे, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा. वे पुरानी NPS व्यवस्था में ही रहेंगे.
यह फैसला कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है?
पिछले काफी समय से सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग कर रहे थे क्योंकि NPS का पैसा मार्केट पर निर्भर करता था. अब इस नए बदलाव से कर्मचारियों को एक तय इनकम का भरोसा मिलेगा. अब उन्हें रिटायरमेंट के बाद इस बात की चिंता नहीं होगी कि मार्केट गिरा है या उठा है, बल्कि उन्हें अपनी आखिरी सैलरी के आधार पर एक फिक्स अमाउंट मिलता रहेगा.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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