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हर दिन एक करोड़ का कारोबार करने वाले गढ़वा बाजार समिति में हैं बड़े-बड़े गड्ढे, दुकान-गोदाम जर्जर

Updated at : 29 Sep 2023 5:56 AM (IST)
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हर दिन एक करोड़ का कारोबार करने वाले गढ़वा बाजार समिति में हैं बड़े-बड़े गड्ढे, दुकान-गोदाम जर्जर

जो बाजार समिति कभी अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य व सुविधाओं का विस्तार करता था. जो दूसरों को फंड उपलब्ध कराता था, आज उसकी खुद की स्थिति खस्ता हाल है. दुकानें और गोदाम जर्जर हो चुके हैं. सड़कें कीचड़ में तब्दील हो चुकी है.

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गढ़वा, जितेंद्र सिंह : गढ़वा कृषि उत्पादन बाजार समिति में प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये का कारोबार होता है. पर यहां व्यापारियों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. परिसर के बड़े-बड़े गड्ढों में आये दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. पर बाजार समिति प्रबंधन को इससे कोई लेना-देना नहीं है. जो बाजार समिति कभी अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य व सुविधाओं का विस्तार करता था. जो दूसरों को फंड उपलब्ध कराता था, आज उसकी खुद की स्थिति खस्ता हाल है. दुकानें और गोदाम जर्जर हो चुके हैं. सड़कें कीचड़ में तब्दील हो चुकी है. यहां आने वाले किसान इसी स्थिति में अपने उत्पाद लेकर बैठने को मजबूर हैं. बाजार समिति में फल, सब्जी, अनाज व किराने के सामानों का प्रतिदिन एक करोड़ रुपये का करोबार होता है. बताते चलें कि गढ़वा का बाजार समिति से समीपवर्ती राज्य छतीसगढ़ यूपी एवं बिहार के व्यापारी भी पहुंचते हैं. यहां बड़े पैमाने पर कई राज्यों से प्रतिदिन दर्जनों ट्रक आलू, फल और अनाज का आवक होता है. यहां से आस-पास के बाजारों के अलावे समीपवर्ती राज्यों में भी सामान पहुंचता है. लेकिन व्यापारियों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता तथा उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

वर्षों से नहीं हुई मरम्मत

कृषि उत्पादन बाजार समिति परिसर में भवन, गोदाम व दुकान जर्जर स्थिति में हैं. वर्षों से इनकी मरम्मत न होने से कई भवन गिरने की स्थिति में पहुंच गये हैं. सड़कों की स्थिति भी बदतर है. सड़क की जगह कीचड़ ने ले ली है. किसान अपने उत्पाद लेकर यहीं बैठने को मजबूर हैं. ग्राहक, व्यापारी, किसान सबको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बोर्ड द्वारा फंड उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण परिसर की यह स्थिति हो गयी है.

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पहले प्रतिवर्ष 3.5 करोड़ की होती थी आमदनी

कृषि उत्पादन बाजार समिति परिसर में कुल 24 गोदाम व 150 दुकानें हैं. इनमें से ज्यादातर की स्थिति जर्जर है. साफ सफाई की समुचित व्यवस्था न होने से परिसर में आने वालों को बहुत परेशानी होती है. मालूम हो कि जिले के कुल 38 हाट बाजारों की बंदोबस्ती से बाजार समिति को प्रतिवर्ष 3.5 करेाड़ रुपये की आमदनी होती थी, जो अब पूरी तरह से बंद हो गयी है. इधर अब इस मामले में कृषि उत्पादन बाजार समिति के पणन सचिव से बाजार परिसर में सुविधाओं, विकास, कमियां, क्षेत्रफल व आवश्यकता के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट की मांग की गयी है.

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मंत्री से मिला है आश्वासन : अध्यक्ष

बाजार समिति व्यवसायी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता उर्फ फंटूस ने बताया कि बाजार समिति में सुविधाओं को बहाल करने को लेकर उन्होंने स्थानीय विधायक सह राज्य के मंत्री मिथिलेश ठाकुर से मुलाकात की है. मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि शीघ्र ही इस बारे में ठोस कदम उठाया जायेगा.

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सुविधाओं को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है : पणन सचिव

इस संबंध में पूछे जाने पर पणन सचिव राहुल कुमार ने बताया कि परिसर में सुविधाओं का अभाव है. सड़कें भी जर्जर हैं. इन सब को लेकर उन्होंने बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है. उन्होंने कहा कि परिसर में बने गड्ढे को शीघ्र भरवाया जायेगा ताकि व्यापारियों को परेशानी न हो.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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