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200 रुपये के नोट का सच जानेंगे तो आपके भी उड़ जाएंगे होश, फटाफट कीजिए चेक

Updated at : 11 Jan 2025 12:44 PM (IST)
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200 Rupee Note

200 Rupee Note

Fake 200 Rupee Notes: देश में नकली नोटों का प्रचलन एक बार फिर जोर पकड़ रहा है. आज से करीब 9 साल पहले नकली नोटों के चलन को समाप्त करने और विदेश में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने बड़े नोटों को अचानक चलन से बाहर कर दिया था, लेकिन तब भी नकली नोटों के चलन की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.

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Fake 200 Rupee Notes: देश में नकली नोटों का बाजार एक बार फिर गरम है. बिहार के बाजारों में 500 रुपये के नकली नोट धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, तो अब 200 रुपये के नकली नोट भी बाजार में आ गए हैं. हालांकि, नकली नोटों के चलन को बाजार से समाप्त करने के लिए सरकार ने करीब 9 साल पहले 2016 में 500 और 1000 रुपये के नोटों को एक झटके में चलन से बाहर कर दिया था. इन दोनों बड़े नोटों को चलन से अचानक बाहर कर दिए जाने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया था, तब आरबीआई ने 2000, 500, 200 और 100 रुपये के नए नोट जारी किए थे. 2000 का नोट 2023 में चलन से बाहर कर दिया गया. बाकी के बचे 500 और 200 के नकली नोट एक बार फिर बाजार में तेजी से दौड़ रहे हैं.

बाजार में आ गया 200 रुपये का नकली नोट

एशिया नेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 200 रुपये के नकली नोटों ने तेलंगाना के निर्मल जिले में हड़कंप मचा दिया है. व्यापारी इन नोटों को लेने से डर रहे हैं और लेन-देन में सावधानी बरत रहे हैं. नकली नोट एकदम असली जैसे दिखते हैं, जिससे लोगों को धोखा हो रहा है. देशभर में एक नई चर्चा शुरू हो गई है. लोग अपने पास मौजूद 200 रुपये के नोटों के बारे में सोच रहे हैं और वे घर जाकर चेक कर रहे हैं कि उनके पास कितने नोट हैं.

धड़ल्ले से छापे जा रहे हैं 200 रुपये नकली नोट

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की शाम 8 बजे नकली नोटों को रोकने और विदेशी बैंक खातों में जमा काला धन वापस लाने के लिए नोटबंदी की थी. लेकिन, नोटबंदी के बाद भी सरकार का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है. आरबीआई की ओर से जारी किए गए 500 और 200 रुपये के नोटों की भी जालसाज नकल कर रहे हैं. पहले ही कई जगहों पर 500 रुपये के नकली नोट मिले हैं. अब 200 रुपये के नकली नोट भी धड़ल्ले से छापे जा रहे हैं.

पकड़े जा रहे 200 रुपये के नकली नोट

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया रिपोर्टों में कहा गया है, ”200 रुपये के नकली नोटों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है. वित्त वर्ष 2019-20 में, 200 रुपये के 31,969 नकली नोट पकड़े गए, जबकि 2018-19 में यह संख्या 12,728 थी, जो 151% की वृद्धि दर्शाती है.”

तेलंगाना में बढ़ा 200 रुपये के नकली नोटों का प्रचलन

एशिया नेट हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के निर्मल जिले में हाल ही में 200 रुपये के नकली नोटों का प्रचलन बढ़ा है, जिससे व्यापारी और स्थानीय लोग सतर्क हो गए हैं. नकली नोट असली जैसे दिखने के कारण पहचानना मुश्किल हो रहा है, जिससे व्यापारियों को लेन-देन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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नकली नोटों की पहचान के लिए RBI ने दी जानकारी

  • देवनागरी में ‘200’: असली नोट पर देवनागरी लिपि में ‘200’ अंकित होता है.
  • महात्मा गांधी की तस्वीर: नोट के मध्य में महात्मा गांधी की स्पष्ट तस्वीर छपी होती है.
  • माइक्रो लेटरिंग: नोट पर ‘RBI’, ‘भारत’, ‘INDIA’ और ‘200’ सूक्ष्म अक्षरों में लिखे होते हैं.
  • सिक्योरिटी थ्रेड: नोट में सुरक्षा धागा होता है, जिस पर ‘भारत’ और ‘RBI’ लिखा होता है.
  • अशोक स्तंभ: नोट के दाईं ओर अशोक स्तंभ का प्रतीक होता है.

200 रुपये के नकली नोट पर आरबीआई की अपील

200 रुपये के नकली नोटों के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए RBI ने जनता से अपील की है कि वे लेन-देन के दौरान सतर्क रहें और उसकी सही तरीके से जांच करें. यदि किसी को नकली नोट मिलता है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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